रिजर्व बैंक के हालिया मंथली बुलेटिन में इकोनॉमी में रिकवरी की उम्मीद जताई गई है। बुलेटिन के मुताबिक, फूड प्राइस में गिरावट की वजह से कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) इनफ्लेशन नवंबर में 5.5 पर्सेंट रहा। साथ ही, रबी फसलों की बुआई भी पटरी पर है और ग्रामीण खपत को लेकर भी संभावनाएं बेहतर बनी हुई हैं।
बुलेटिन में कहा गया है कि इकोनॉमी में सितंबर तिमाही के दौरान आई सुस्ती के बाद इसमें रिकवरी देखने को मिल रही है। रिजर्व बैंक का कहना है कि ग्रोथ में रिकवरी को फेस्टिव सीजन के दौरान की गतिविधियों और ग्रामीण क्षेत्रों में मांग में बेहतरी से सहारा मिला है। इकोनॉमी की स्थिति को लेकर बुलेटिन में कहा गया है, 'वित्त वर्ष 2024-25 के लिए हाई फ्रीक्वेसी इंडिकेटर्स से पता चलता है कि दूसरी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती के बाद अब इसमें रिकवरी देखने को मिल रही है।' सितंबर 2024 तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट गिरकर 7 तिमाही के निचले स्तर पर पहुंच गई थी।
इसके अलावा, RBI को चुनावी रेवड़ियों से चिंता होने लगी है। केंद्रीय बैंक ने अपने दिसंबर बुलेटिन माना है कि मौजूदा कारोबारी साल में बजट में घोषित रियायतों, फ्री गिफ्ट से सामाजिक और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए संसाधन कम पड़ सकते हैं। RBI के स्टाफ पेपर में कहा गया है कि इन रियायतों में कृषि और घरों के लिए मुफ्त बिजली, मुफ्त परिवहन, बेरोजगार युवाओं को भत्ते और महिलाओं को वित्तीय सहायता शामिल हैं।
RBI ने राज्यों को सलाह दी है कि केंद्र की योजनाओं को राज्यों के हिसाब से तर्कसंगत बनाने से अधिक प्रोडक्टिव उपायों पर खर्च करने की गुंजाइश बन सकती है।