GST compensation : वित्त मंत्रालय मार्च, 2022 में समाप्त वित्त वर्ष के लिए आठ महीनों का बकाया जीएसटी क्षतिपूर्ति राज्यों को पहले ही जारी कर चुका है। फिलहाल सेस फंड (cess fund) में पर्याप्त पैसा नहीं होने के कारण 78,704 करोड़ रुपये बकाया हैं।
GST compensation : वित्त मंत्रालय मार्च, 2022 में समाप्त वित्त वर्ष के लिए आठ महीनों का बकाया जीएसटी क्षतिपूर्ति राज्यों को पहले ही जारी कर चुका है। फिलहाल सेस फंड (cess fund) में पर्याप्त पैसा नहीं होने के कारण 78,704 करोड़ रुपये बकाया हैं।
मंत्रालय ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि आम तौर पर किसी भी वित्त वर्ष के लिए 10 महीने (अप्रैल से जनवरी) के लिए जीएसटी क्षतिपूर्ति जारी की जाती है। वहीं, फरवरी-मार्च के लिए क्षतिपूर्ति अगले वित्त वर्ष में दी जाती है।
सेस फंड में पैसा होगा तभी जारी होगी क्षतिपूर्ति
मंत्रालय के अनुसार, ‘‘वित्त वर्ष 2021-22 के 10 में से आठ महीनों के लिए राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति जारी कर दी गई है। लंबित राशि भी तब जारी की जाएगी जब सेस फंड में धनराशि होगी।’’
GST के तहत आवश्यक सामानों को टैक्स से छूट है या सबसे कम स्लैब के साथ टैक्स वसूला जाता है, वहीं लक्सरी और डिमेरिट आइटम्स पर सबसे ज्यादा स्लैब पर टैक्स लिया जाता है।
राज्यों को पांच साल तक क्षतिपूर्ति पर बनी थी सहमति
लग्सरी और सिन गुड्स पर सबसे ऊंचे 28 फीसदी के स्लैब के साथ ही सेस भी लगता है। सेस से मिली धनराशि को GST लागू होने के कारण रेवेन्यू के नुकसान के बदले में क्षतिपूर्ति में इस्तेमाल किया जाता है। एक जुलाई, 2017 को जब GST लागू हुआ था, तब केंद्र ने जून, 2022 तक यानी पांच साल तक के लिए राज्यों को क्षतिपूर्ति और 2015-16 के बेस ईयर पर सालाना 14 फीसदी ज्यादा रेवेन्यू की सुरक्षा पर सहमति दी थी।
78,704 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति है बकाया
मंत्रालय ने कहा कि रेवेन्यू लॉस की क्षतिपूर्ति के लिए राज्यों को 7.35 लाख करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। मंत्रालय ने कहा, “वर्तमान में, सिर्फ 2021-22 का 78,704 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति ही बकाया है, जो चार महीने की क्षतिपूर्ति के बराबर है।”
वित्त वर्ष 2020-21 के लिए राज्यों का कोई क्षतिपूर्ति बकाया नहीं है और राज्यों को लोन सहित कुल 2.78 लाख करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।
2017-18 के दौरान राज्यों को क्षतिपूर्ति कोष (compensation fund) से 49,000 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति जारी किया गया था। 2018-19 में यह धनराशि बढ़कर 83,000 करोड़ रुपये और 2019-20 में 1.65 लाख करोड़ रुपये हो गई।
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