इंडिया ने यूरोपीय यूनियन (EU) के एक प्रस्ताव के खिलाफ WTO में शिकायत करने का प्लान बनाया है। इस प्रस्ताव में हाई-कार्बन गुड्स के आयात पर 20 से 35 फीसदी शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। इसका मतलब है कि यूरोपीय संघ इंडिया से आयातित स्टील, आयरन ओर और सीमेंट पर यह शुल्क लगा सकती है। सरकार और इंडस्ट्री के शीर्ष सूत्रों ने यह जानकारी दी। यह ईयू के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म का मुकाबले करने की इंडिया की रणनीति का हिस्सा है। दरअसल, ईयू कार्बन एमिशन में कमी लाने के लिए नई टेक्नोलॉजी में निवेश के लिए लोकल इंडस्ट्री को बढ़ावा देना चाहता है।
पिछले महीने EU ने प्रस्ताव को दी है मंजूरी
कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ईयू नेताओं से मुलाकात के लिए ब्रूसेल्स के दौरे पर हैं। इस बातचीत में गोयल व्यापार को बढ़ावा देने और द्विपक्षीय व्यापार से जुड़े मसलों के समाधान की कोशिश करेंगे। पिछले महीने ईयू ने 2026 से हाई-कार्बन गुड्स के आयात पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। इसका असर ईयू के स्टील, सीमेंट, अल्युमीनियम, फर्टिलाइजर्स और हाइड्रोजन के आयात पर पड़ेगा। ईयू 2050 तक ग्रीन हाउस गैसों का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर देना चाहता है। इंडिया ने इसके लिए 2070 का लक्ष्य रखा है।
व्यापार में बाधा पैदा करने का आरोप
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा के नाम पर ईयू व्यापार में बाधा पैदा करने की कोशिश कर रहा है। इसका असर न सिर्फ इंडिया के एक्सपोर्ट पर पड़ेगा बल्कि दूसरे विकासशील देशों के निर्यात पर भी पड़ेगा। सरकार डब्ल्यूटीओ में ईयू के प्रस्ताव के खिलाफ शिकायत दाखिल कर निर्यातकों के हितों की सुरक्षा की कोशिश करेगी। इंडिया खासकर छोटे एक्सपोर्टर्स के हितों की सुरक्षा करना चाहती है। इंडिया का मानना है कि ईयू का प्रस्ताव भेदभावपूर्ण है। यह व्यापार में भी बाधा पैदा करता है।
ईयू के प्रस्ताव के पालन के लिए समय चाहिए
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस के डायरेक्टर जनरल अजय साहनी ने कहा कि स्टील और दूसरे मैन्युफैक्चरर्स को ईयू की गाइडलाइंस पूरी करने के लिए ज्यादा समय चाहिए। हालंकि, उन्होंने कहा कि आखिर में उन्हें दुनिया में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए एमिशन में कमी करनी होगी। फेडरेशन ने कहा है कि ईयू के प्लान से दूसरे देशों के साथ इंडिया के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। इससे निर्यात होने वाली कई चीजों की कीमतें 20 फीसदी तक बढ़ सकती हैं।