GDP Growth: सरकार ने मंगलवार की शाम वित्त वर्ष 2022 की अंतिम तिमाही (मार्च तिमाही) के जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े जारी किए। जनवरी से मार्च के दौरान जीडीपी 4.1 फीसदी बढ़ी है। कोरोना की तीसरी लहर और यूक्रेन क्राइसिस का असर मार्च तिमाही में जीडीपी की ग्रोथ पर पड़ा है। मार्च तिमाही की सुस्त ग्रोथ को देखते हुए सरकार ने पूरे वित्त वर्ष (FY 2021-22) की ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 8.7% कर दिया है।
वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी में 6.6 फीसदी की गिरावट आई थी। इसकी वजह कोरोना की महामारी थी। सरकार ने महामारी को बढ़ने से रोकने के लिए लॉकडाउन किया था। इससे आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ गई थीं। इसके चलते जीडीपी में गिरावट आई थी।
अगर फाइनेंशियल ईयर 2019-20 की जीडीपी ग्रोथ की तुलना FY 2020-21 से की जाए तो ग्रोथ सिर्फ 1.5 फीसदी ज्यादा है। स्टैटिस्टिक्स मिनिस्ट्री ने FY 2021-22 में जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 8.7 फीसदी कर दिया है। उसने फरवरी में अपने दूसरे एडवान्स एस्टिमेट में जीडीपी ग्रोथ 8.9 फीसदी रहने की उम्मीद जताई थी।
FY 2021-22 जीडीपी की नॉमिनल ग्रोथ 19.5 फीसदी रही। अगर पिछले वित्त वर्ष में जीडीपी की ग्रोथ 8.7 फीसदी रहती है तो यह कम से कम 17 साल में इकोनॉमी की सबसे तेज ग्रोथ होगी। हालांकि, मार्च तिमाही की 4.1 फीसदी की ग्रोथ बीती चार तिमाही में सबसे कम है।
सांख्यिकी मंत्रालय की तरफ से मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, इससे पहले वित्त वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही यानी दिसंबर तिमाही में देश की GDP ग्रोथ रेट धीमी होकर 5.4% रही थी, जो इसके पहले दूसरी तिमाही में 8.5% और पहली तिमाही में 20.3% थी।
भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारतीय अर्थव्यवस्था कोरोना महामारी के साये से उबरना शुरू ही हुई थी कि जनवरी में ओमिक्रोन वेरिेएंट के चलते देश में फिर से कोरोना वायरस के मामले बढ़ने लगे थे। इसके चलते सरकारों को कई तरह के प्रतिबंध लगाने पड़े थे। वायरस का असर होते ही फरवरी के दूसरे पखवाड़े में यूक्रेन और रूस के बीच जंग छिड़ गई। जंग के चलते कमोडिटी के दाम आसमान पर पहुंच गए और कई सामानों की सप्लाई भी प्रभावित हुई।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च तिमाही में कृषि सेक्टर में 4.1 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 0.2 फीसदी का संकुचन यानी कमी देखने को मिली। चौथी तिमाही के दौरान ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) 3.9 फीसदी रही, जबकि पूरे वित्त वर्ष के दौरान यह 8.1 फीसदी था।