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MC Exclusive : इंडियन इकोनॉमी की सेहत कैसी है? जानिए RBI की MPC के सदस्यों का क्या है जवाब

मई की शुरुआत से अब तक एमपीसी इंटरेस्ट रेट 1.40 फीसदी बढ़ा चुकी है। इसका मकसद तेजी से बढ़ते इनफ्लेशन को काबू में करना है। हालांकि, इंटरेस्ट रेट में ज्यादा बढ़ोतरी का खराब असर इकोनॉमिक ग्रोथ पर पड़ सकता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 24, 2022 पर 6:17 PM
MC Exclusive : इंडियन इकोनॉमी की सेहत कैसी है? जानिए RBI की MPC के सदस्यों का क्या है जवाब
रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) इंटरेस्ट रेट में बदलाव के बारे में फैसले लेती है।

रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) इंटरेस्ट रेट में बदलाव के बारे में फैसले लेती है। मई की शुरुआत से अब तक एमपीसी इंटरेस्ट रेट 1.40 फीसदी बढ़ा चुकी है। इसका मकसद तेजी से बढ़ते इनफ्लेशन को काबू में करना है। हालांकि, इंटरेस्ट रेट में ज्यादा बढ़ोतरी का खराब असर इकोनॉमिक ग्रोथ पर पड़ सकता है। मनीकंट्रोल ने इकोनॉमिक ग्रोथ (Economic Growth) और इनफ्लेशन (Inflation) के बारे में MPC के सदस्यों के साथ विस्तार से बातचीत की।

MPC के सदस्य शशांक भिडे (Shashanka Bhide) ने ग्रोथ के बारे में कहा कि मैन्युफैक्चरिंग में कैपेसिटी यूटलाइजेशन में सुधार हुआ है। सप्लाई के रास्ते की कुछ बाधाएं भी दूर हुई हैं। यह इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए अच्छी बात है। इनफ्लेशन के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि कीमतों में स्थिरता आई है। हालांकि, साल दर साल आधार पर अब भी कीमतें ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इनफ्लेशन 5 फीसदी पर आने की उम्मीद है।

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अशीमा गोयल (Ashima Goyal) ने इकोनॉमिक ग्रोथ के बारे में कहा कि ग्लोबल स्लोडाउन की स्थिति में इंडिया के लिए 7 फीसदी से ज्यादा की इकोनॉमिक ग्रोथ बहुत अच्छी है। उन्होंने अगले फाइनेंशियल ईयर में ग्रोथ घटकर 6 फीसदी रह जाने का अनुमान जताया। इनफ्लेशन के बारे में उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लंबे समय तक मुश्किल में रहने की वजह से इनफ्लेशन लगातार ऊंचे स्तर पर बना रहा। अब कमोडिटी की कीमतों में नरमी आ रही है। सप्लाई चेन की दिक्कतें भी कम हो रही हैं। ऐसे में इनफ्लेशन में उम्मीद के मुकाबले तेज गिरावट दिख सकती है।

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