Nirmala Sitharaman ने कहा, मुझे पता नहीं कि सरकार ग्लोबल सूचकांकों में सॉवरेन बॉन्ड को शामिल होने से रोक रही है

ग्लोबल बॉन्ड सूचकांकों में इंडियन बॉन्ड्स के शामिल होने पर मार्केट की करीबी नजरें लगी हुई हैं, क्योंकि इससे सॉवरेन बॉन्ड्स में अरबों डॉलर के निवेश का रास्ता खुल सकता है

अपडेटेड Sep 05, 2022 पर 2:58 PM
सरकारी बॉन्ड्स में इनवेस्टमेंट पर होने वाले मुनाफे पर टैक्स को लेकर सरकार और EUROCLEAR के बीच गतिरोध बना हुआ है। EUROCLEAR बेल्जियम का प्लेटफॉर्म है, जिसका इस्तेमाल अधिकतर इनवेस्टर्स सिक्योरिटी में ट्रांजेक्शन सेटल करने के लिए करते हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने सोमवार (5 सितंबर) को कहा कि मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि सरकार ग्लोबल सूचकांकों (Global Indices) में सॉवरेन बॉन्ड्स (Sovereign Bonds) को शामिल होने से रोक रही है। उन्होंने Ashwamedh-Elara India Dialogue 2022 में यह बात कही।

सीतारमण ने कहा, "मुझे नहीं पता कि हम इसे बॉन्ड सूचकांकों में शामिल होने से रोक रहे हैं। लेकिन, मेरा मानना है कि इसका ऐलान मैंने 2020 के बजट में किया था। उसके बाद से वैश्विक स्थितियों में बहुत बदलाव आया है। इसमें कोरोना की महामारी और दूसरी चीजों का हाथ है। फ्लो उतना ज्यादा नहीं रहा है, जितना हम चाहते थे।"

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उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि यह मामला जल्द अपने अंजाम तक पहुंचेगा। वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब यह माना जा रहा था कि इंडियन गवर्नमेंट के बॉन्ड्स (सॉवरेन बॉन्ड्स) इस महीने की शुरुआत में JP Morgan के Government Bond Index (Emerging Markets) का हिस्सा बन सकते हैं। ग्लोबल बॉन्ड सूचकांकों में इंडियन बॉन्ड्स के शामिल होने पर मार्केट की करीबी नजरें लगी हुई हैं, क्योंकि इससे सॉवरेन बॉन्ड्स में अरबों डॉलर के निवेश का रास्ता खुल सकता है।

इंडिया में बॉन्ड्स में विदेशी निवेश की सीमा तय है। विदेशी इनवेस्टर्स कुल जारी किए गए बॉन्ड्स के एक निश्चित फीसदी तक ही इसमें निवेश कर सकते हैं। लेकिन, सरकार ने विदेशी इनवेस्टर्स को एक स्पेशल कैटेगरी के जरिए बॉन्ड्स में निवेश करने की इजाजत दी है। इसे Fully Accessible Route कहा जाता है। इसके तहत तय सीमा से ज्यादा कुछ बॉन्ड्स खरीदे जा सकते हैं। करीब छह महीनों की बिकवाली के बाद अगस्त में इंडियन बॉन्ड्स में विदेशी निवेशकों की खरीदारी देखने को मिली।

अगस्त के आखिर में एक सीनियर अधिकारी ने मनीकंट्रोल को बताया था कि केंद्र सरकार ग्लोबल सूचकांकों पर इंडियन गवर्नमेंट बॉन्ड्स को शामिल करने को लेकर बेकरार नहीं है। सरकार अब भी टैक्स छूट नहीं देने के अपने रुख पर कायम है, जिसकी डिमांड की गई है।

सरकारी बॉन्ड्स में इनवेस्टमेंट पर होने वाले मुनाफे पर टैक्स को लेकर सरकार और Euroclear के बीच गतिरोध बना हुआ है। Euroclear बेल्जियम का प्लेटफॉर्म है, जिसका इस्तेमाल अधिकतर इनवेस्टर्स सिक्योरिटी में ट्रांजेक्शन सेटल करने के लिए करते हैं। वह बॉन्ड में निवेश से होने वाले मुनाफे पर टैक्स छूट की मांग कर हा है। इधर, सरकार का कहना है कि बॉन्ड्स से होने वाले प्रॉफिट पर टैक्स लगाने के अपने अधिकार को नहीं छोड़ेगी।

फाइनेंस मिनिस्टर ने देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी LIC की लिस्टिंग के बारे में भी कुछ बातें कहीं। उन्होंने कहा कि LIC रणनीतिक विनिवेश हो चुका है। अब हम बैंकिंग सेक्टर में भी रिफॉर्म्स के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे। इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। हमने इस बारे में बजट में ऐलान किया था। हम इस दिशा में आगे बढ़ेंगे।

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