ब्याज दर में जल्द हो सकती है कटौती, फरवरी में शुरू होगा सिलसिला: क्रिसिल

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Crisil) का कहना है कि रिजर्व बैंक जल्द ब्याज दर में कटौती कर सकता है। मैक्रोइकोनॉमिक्स पर अपने हालिया नोट में क्रिसिल ने कहा है कि रिजर्व बैंक (RBI) का ब्याज दर में कटौती का सिलसिला फरवरी में शुरू हो सकता है। क्रिसिल में चीफ इकोनॉमिस्ट धर्मकीर्ति जोशी की अगुवाई में तैयार किए गए नोट के मुताबिक, फूड इनफ्लेशन में कमी हो सकती है और ग्लोबल माहौल दर में कटौती के अनुकूल है

अपडेटेड Jan 13, 2025 पर 7:57 PM
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एनालिस्ट्स का कहना है कि हालिया तिमाहियों में आई सुस्ती से ब्याज दर में कटौती के लिए संभावनाएं तेज हो गई हैं।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Crisil) का कहना है कि रिजर्व बैंक जल्द ब्याज दर में कटौती कर सकता है। मैक्रोइकोनॉमिक्स पर अपने हालिया नोट में क्रिसिल ने कहा है कि रिजर्व बैंक (RBI) का ब्याज दर में कटौती का सिलसिला फरवरी में शुरू हो सकता है। क्रिसिल में चीफ इकोनॉमिस्ट धर्मकीर्ति जोशी की अगुवाई में तैयार किए गए नोट के मुताबिक, फूड इनफ्लेशन में कमी हो सकती है और ग्लोबल माहौल दर में कटौती के अनुकूल है।

नोट में कहा गया है, 'ब्याज दर में कटौती की मुख्य बाधा फूड इनफ्लेशन है। कृषि उत्पादन बेहतर रहने की वजह से फूड इनफ्लेशन में गिरावट की संभावना है।' नोट के मुताबिक, कई अहम अर्थव्यवस्थाओं में मॉनिटरी पॉलिसी में ढील का सिलसिला शुरू हो गया है, लेकिन ब्याज दर में कटौती को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

इसमें कहा गया है, 'ट्रंप की जीत के बाद अमेरिका में टैरिफ में बढ़ोतरी और इससे इनफ्लेशन बढ़ने की संभावनाएं तेज हो गई हैं। इसके अलावा, टैक्स कटौती को लेकर भी चर्चा है, जिससे फिस्कल मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ सकती हैं। इन वजहों से एसएंडपी ग्लोबल को लगता है कि फेडरल रिजर्व 2025 में पिछले अनुमानों के मुकाबले कम बार ब्याज दरों में कटौती करेगी। हालांकि, ग्लोबल माहौल ब्याज दर में कटौती के अनुकूल है।' अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने दिसंबर में 0.25 पर्सेंट की कटौती की थी।


घरेलू मोर्चे पर बात करें, तो एनालिस्ट्स का कहना है कि हालिया तिमाहियों में आई सुस्ती से ब्याज दर में कटौती के लिए संभावनाएं तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकीय ऑफिस के पहले एडवांस अनुमानों में कहा गया है कि मौजूदा फिस्कल ईयर के दौरान ग्रोथ घटकर 6.4 पर्सेंट रह जाने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 8.2 पर्सेंट था।

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