जल्द महंगाई से मिलेगी राहत, RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने खुद कही यह बात

इंडियन इकोनॉमी दो साल तक कोरोना की महामारी से बेहाल रही है। अब वह रिकवरी दिखा रही है। लेकिन इनफ्लेशन पिछले कई महीनों से RBI के टारगेट से ऊपर बना हुआ है। इसकी वजह दुनियाभर में फूड और कमोडिटी की कीमतों में उछाल है

अपडेटेड Jul 09, 2022 पर 3:31 PM
दास ने कहा कि यह ऐसा वक्त है जब हाई इनफ्लेशन दुनियाभर में देखा जा रहा है, जबकि ग्लोबल ट्रेड में कमी आ रही है।

इस फाइनेंशियल ईयर (2022-23) की दूसरी छमाही में महंगाई में धीरे-धीरे कमी आएगी। इससे इकोनॉमी में इनफ्लेशन के चलते बड़ी गिरावट आने की आशंका घटेगी। RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शनिवार (9 जुलाई) को यह जानकारी दी।

कौटिल्य इकोनॉमिक कनक्लेव में दास ने कहा, "अभी सप्लाई के मोर्चे पर तस्वीर अच्छी दिख रही है। कई इंडेकेटर्स इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान रिकवरी के संकेत दे रहे हैं। अभी हमारा मानना यह है कि इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में धीरे-धीरे इनफ्लेशन घट सकता है। इससे इंडिया में इकोनॉमी को झटका लगने की आशंका घट जाएगी।"

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इंडियन इकोनॉमी दो साल तक कोरोना की महामारी से बेहाल रही है। अब वह रिकवरी दिखा रही है। लेकिन इनफ्लेशन पिछले कई महीनों से RBI के टारगेट से ऊपर बना हुआ है। इसकी वजह दुनियाभर में फूड और कमोडिटी की कीमतों में उछाल है।

आरबीआई ने इनफ्लेशन को बढ़ने से रोकने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ाना शुरू किया है। उसने पहले मई में रेपो रेट बढ़ाया। फिर उसने जून में रेपो रेट बढ़ाया। दो बार की बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट 0.90 फीसदी बढ़ गया है। अब यह 4.9 फीसदी पहुंच गया है।

माना जा रहा है कि RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का सिलसिला जारी रखेगी। MPC की अगली बैठक अगस्त के पहले हफ्ते में होने वाली है। इसमें रेपो रेट में वृद्धि का फैसला लिया जा सकता है।

दास ने कहा कि यह ऐसा वक्त है जब हाई इनफ्लेशन दुनियाभर में देखा जा रहा है, जबकि ग्लोबल ट्रेड में कमी आ रही है। छोटी अवधि में इनफ्लेशन पर उन चीजों का असर पड़ सकता है, जो नियंत्रण के बाहर हैं। लेकिन मध्यम अवधि में मॉनेटरी पॉलिसी का असर इनफ्लेशन पर पडे़गा।

केंद्रीय बैंक की मौजूदा मॉनेटरी पॉलिसी को सही बताते हुए दास ने कहा कि इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए मॉनेटरी पॉलिसी के स्तर पर समय पर कोशिश जरूरी है। इससे इकोनॉमी को ग्रोथ के रास्ते पर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने कहा कि इकोनॉमी में स्थिरता बनाए रखने के लिए RBI अपनी पॉलिसी में बदलाव करना जारी रखेगा। कोरोना की महामारी के दौरान इकोनॉमी को सपोर्ट करने के लिए आरबीआई ने इंटरेस्ट रेट में काफी कमी की थी।

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