RBI ने करेंट फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है। उसने कहा है कि इस फाइनेंशियल ईयर में जीडीपी की ग्रोथ 7 फीसदी रहेगी। पहले उसने इस फाइनेंशियल ईयर में जीडीपी ग्रोथ 7.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।
RBI ने करेंट फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है। उसने कहा है कि इस फाइनेंशियल ईयर में जीडीपी की ग्रोथ 7 फीसदी रहेगी। पहले उसने इस फाइनेंशियल ईयर में जीडीपी ग्रोथ 7.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने 30 सितंबर को मॉनेटरी पॉलिसी पेश की। इसमें उन्होंने कहा कि इस फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 6.3 फीसदी रहेगी। तीसरी तिमाही में जीडीपी की ग्रोथ 4.6 फीसदी रहने का अनुमान है। चौथी तिमाही यानी जनवरी से मार्च की तिमाही में भी जीडीपी ग्रोथ 4.6 फीसदी रहने का अनुमान है।
RBI अगले फाइनेंशियल ईयर यानी 2023-24 में जीडीपी ग्रोथ 7.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। यह RBI के पहले के अनुमान से ज्यादा है। पहले उसने अगले फाइनेंशियल ईयर में जीडीपी ग्रोथ 6.7 फीसदी रहने की उम्मीद जताई थी।
अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में इकोनॉमी की रफ्तार सुस्त पड़ रही है। अमेरिका में जीडीपी में लगातार गिरावट आ रही है। ऐसे में इंडियन इकोनॉमी की करीब 7 फीसदी की ग्रोथ बहुत राहत देने वाली है।
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस फाइनेंशियल ईयर में इनफ्लेशन के लिए 6.7 फीसदी के अपने अनुमान को बनाए रखा है। इस फाइनेंशिय की दूसरी तिमाही में इसके 6 फीसदी रहने का अनुमान है। उन्होंने अगले फाइनेंशियल ईयर में इसमें कमी आने की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि अगले फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में यह घटकर 5 फीसदी पर आ सकता है।
शक्तिकांत दास ने कहा कि कीमतों की स्थिति पर RBI करीबी निगाह रख रहा है। उन्होंने कहा कि फूड प्राइसेज बढ़ने की आशंका बनी हुई है। खरीफ की बुआई कम होने से कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। फूड इनफ्लेशन बढ़ने पर इनफ्लेशनरी प्रेशर बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि RBI की मॉनेटरी पॉलिसी का रुख इकोनॉमी की स्थिति पर निर्भर करेगा।
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