रिजर्व बैंक के रेपो रेट में बदलाव करने का चांस कम, जानिए भारत में कब तक घट सकती हैं ब्याज दरें

अमेरिका में इंटरेस्ट रेट में जल्द कमी की उम्मीद बढ़ी है। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व सितंबर से पहले इंटरेस्ट रेट घटा सकता है। लेकिन, RBI यह साफ कर चुका है कि उस पर अमेरिका में इंटरेस्ट रेट घटने का असर नहीं पड़ेगा। उसने कहा है कि वह घरेलू स्थितियों के आधार पर इंटरेस्ट रेट में कमी के बारे में फैसला लेगा

अपडेटेड Aug 08, 2024 पर 2:25 AM
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आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की बैठक 6 अगस्त को शुरू हुई थी और आज इसका फैसला आएगा

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के 8 अगस्त को इंटरेस्ट रेट में बदलाव नहीं करने की उम्मीद है। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की बैठक 6 अगस्त को शुरू हुई थी। यह बैठक तीन दिन चलेगी। इसके नतीजे 8 अगस्त को आएंगे। उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक अक्टूबर में अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में बदलाव कर सकता है। इससे पहले आरबीआई ने जून में अपनी मॉनेटरी पॉलिसी पेश की थी। तब से वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थितियों में बड़ा बदलाव आया है। जून में अमेरिकी इकोनॉमी की सेहत मजबूत दिख रही थी। हालांकि, पहली तिमाही के जीडीपी ग्रोथ के डेटा उम्मीद से थोड़े कम आए थे। लेकिन, रोजगार के मोर्चे पर तस्वीर अच्छी थी। लेकिन, अब स्थिति कमजोर दिख रही थी।

अमेरिका में सितंबर से पहले घट सकता है इंटरेस्ट रेट

अगस्त में अमेरिका में बेरोजगारी बढ़ी है। इससे अमेरिका में इंटरेस्ट रेट में जल्द कमी की उम्मीद जताई जा रही है। पहले यह बताया जा रहा था कि 2024 में फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) इंटरेस्ट रेट एक बार घटा सकता है। उसके सितंबर में इंटरेस्ट रेट में 0.25 फीसदी कमी करने की उम्मीद थी। अब इंटरेस्ट रेट में कम से कम 0.75 फीसदी कमी की उम्मीद जताई जा रही है। इस साल फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट में 1.25 फीसदी की कमी कर सकता है। सितंबर में इंटरेस्ट रेट 0.50 फीसदी घटने की उम्मीद है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक सितंबर से पहले इंटरेस्ट रेट घटा सकता है।


अमेरिका में रेट घटने का RBI पर नहीं पड़ेगा असर

इधर, RBI कई बार यह साफ कर चुका है कि इंटरेस्ट रेट में कमी के फेडरल रिजर्व के फैसले का उस पर (RBI) असर नही पड़ेगा। उसने कहा है कि वह घरेलू स्थितियों के आधार पर इंटरेस्ट रेट में कमी का फैसला लेगा। हालांकि, ऐसा नहीं लगता है कि अमेरिका में इंटरेस्ट रेट घटने का कोई असर आरबीआई पर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड जून के 4.4 फीसदी से गिरकर 3.8 फीसदी पर आ गई है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था की सेहत खराब होने के संकेत

अमेरिकी इकोनॉमी अब भी दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी है। हाल तक यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की ग्रोथ का इंजन रहा है। हालांकि, अमेरिकी इकोनॉमी की रफ्तार सुस्त पड़ने के संकेत मिले हैं। माना जा रहा है कि दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी मंदी में जा सकती है। अमेरिकी इकोनॉमी का मंदी में जाना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर नहीं है, क्योंकि चीन की इकोनॉमी की रफ्तार पहले से सुस्त चल रही है। वहां गुड्स और सर्विसेज की मांग घट गई है। इससे चीन की कंपनियां इलेक्ट्रिक व्हीकल्स से लेकर सोलर पैनल तक बहुत सस्ते दामों पर विदशी बाजारों में बेच रही हैं। इससे कई देशों ने चीन के उत्पादों पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई है।

बैंक डिपॉजिट पर RBI की कमेंट्री पर होंगी नजरें

यह तय है कि आरबीआई 8 अगस्त को इंटरेस्ट रेट में बदलाव नहीं करेगा। ऐसे में निगाहें बैंक डिपॉजिट को लेकर केंद्रीय बैंक की कमेंट्री पर होंगी। कोविड की महामारी शुरू होने के बाद बैंकों ने डिपॉजिट पर इंटरेस्ट रेट घटाए थे। इससे लोगों ने बैंकों में पैसे रखने की जगह उसे शेयरों और म्यूचुअल फंडों में निवेश करना शुरू कर दिया। इस बीच, डिजिटल ट्रांजेक्शन का इस्तेमाल बढ़ने से बैंकों के डिपॉजिट में अचानक कमी आने का रिस्क बढ़ गया है। आरबीआई इस बारे में चिंता जता चुका है। 8 अगस्त को मॉनेटरी पॉलिसी में केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट को लेकर अपनी सोच का संकेत दे सकता है।

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