भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में बड़ा ऐलान कर सकती है। केंद्रीय बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) अब गुरुवार को आएगी। इसमें आरबीआई रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) बढ़ाने का ऐलान कर सकता है। इसके अलावा केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की घोषणा कर सकता है। इसके तहत वह इमर्जेंसी सपोर्ट धीरे-धीरे वापस लेगा। अंग्रेजी बिजनेस न्यूज वेबसाइट मिंट ने यह खबर दी है।
आरबीआई ने साल 2020 में कोरोना की महामारी शुरू होने के बाद अपनी पॉलिसी को उदार बनाया था। कोरोन की मार से बेहाल इकोनॉमी की हेल्प के लिए उसने ऐसा किया था। अब दुनिया भर में हालात सामान्य हो रहे हैं। इसलिए अमेरिका सहित कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने अपनी पॉलिसी को फिर से नॉर्मल बनाने का ऐलान किया है।
मिंट ने कहा है कि उसके पोल में शामिल 12 इकोनॉमिस्ट्स में से 8 ने मॉनेटरी पॉलिसी में रिवर्स रेपो रेट में वृद्धि की उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि इसमें 20 से 25 बेसिस प्वॉइंट्स की वृद्धि की जा सकती है। इससे यह बढ़कर 3.55 से 3.6 फीसदी हो जाएगा। अभी यह 3.35 फीसदी है। पोल में शामिल सिर्फ 4 इकोनॉमिस्ट्स ने रिवर्स रेपो में किसी तरह का बदलाव नहीं होने की उम्मीद जताई है। हालांकि, इस बात को लेकर आम राय है कि इस बार रेपो रेट में केंद्रीय बैंक बदलाव नहीं करेगा।
अब आरबीआई की एमपीसी की बैठक मंगलवार को शुरू होगी। इसके नतीजे गुरुवार को आएंगे। सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के निधन के बाद महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को राजकीय अवकाश का ऐलान किया है। इसके चलते अब एमपीसी की बैठक मंगलवार को शुरू होगी। पहले यह सोमवार को शुरू होने वाली थी और बुधवार को खत्म होने वाली थी।
यह इस वित्त वर्ष के दौरान आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी की आखिरी बैठक होगी। इंग्लैंड और अमेरिका सहित दुनिया भर में केंद्रीय बैंकों ने अपनी मौद्रिक नीति को सख्त बनाने का ऐलान किया है। ऐसे में आरबीआई के पास रिवर्स रेपो रेट को बढ़ाने के अलावा दूसरा कोई ऑप्शन नहीं है। रिवर्स रेपो रेट वह रेट है, जिस पर केंद्रीय बैंक बैंकों को फंड मुहैया कराता है। इससे पहले ब्रिटिश फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस बार्कलेज भी रिवर्स रेपो में वृद्धि का अनुमान जता चुका है।