एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की वैल्यू मंगलवार को पहली बार 80 के पार चली गई। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि रुपये की कीमत घटते से आयात महंगा हो गया है और इसके चलते भारतीय लोगों का घरेलू खर्च बढ़ने की उम्मीद है।
एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की वैल्यू मंगलवार को पहली बार 80 के पार चली गई। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि रुपये की कीमत घटते से आयात महंगा हो गया है और इसके चलते भारतीय लोगों का घरेलू खर्च बढ़ने की उम्मीद है।
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के चीफ इकोनॉमिस्ट, सुनील कुमार सिन्हा ने बताया, "रुपये में गिरावट और विदेशों से ऊंची कीमत पर ऑयल के इंपोर्ट का असर हमारे द्वारा उपभोग की जाने वाली हर वस्तु की कीमत पर पड़ेगा।"
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अप्रैल 2022 की अपनी मॉनिटरी पॉलिसी रिपोर्ट में कहा था कि रुपये की कीमत में अगर 76 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर की आधारभूत धारणा से 5 प्रतिशत की गिरावट आई, तो महंगाई लगभग 0.20% तक बढ़ सकती है।
इस माहौल में, कुछ घरेलू उत्पादों की कीमतों में दूसरों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। आइए जानते हैं डॉलर के मुकाबले रुपये की वैल्यू 80 के पार जाने से क्या चीजें महंगी हो सकती हैं-
1. फ्यूल और पेट्रोलियम उत्पाद
रुपये में गिरावट का सीधा असर क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर पड़ेगा, जिसके चलते फ्यूल की कीमतें महंगी हो सकती है। फ्यूल की कीमत महंगी होने से ट्रांसपोर्टेशन लागत भी बढ़ेगा, जिसका असर लगभग सभी सेक्टर पर पड़ेगा।
2. वेजिटेबल ऑयल्स
भारत दुनिया के सबसे अधिक एडिबल ऑयल खरीदने वाले देशों में शामिल है। इस साल अप्रैल से जून के बीच भारत ने करीब 525 करोड़ डॉलर का एडिबल ऑयल खरीदा है। इन तेलों की कीमतें इनके इंपोर्ट लागत के मुताबिक बढ़ने की उम्मीद है।
3. खाने-पीने से जुड़े वस्तुओं की कीमत
भारत उर्वरकों (Fertilisers) के आयात पर बहुत अधिक निर्भर है। वित्त वर्ष 2019 से 2021 के बीच देश के उर्वरक आयात में करीब 8% की बढ़ोतरी हुई और यह 188.4 लाख टन से बढ़कर 203.3 लाख टन पर पहुंच गया। इसलिए, रुपये में गिरावट के कारण इसे आयात करने की लागत बढ़ेगी और इसके चलते खेती में अनाज पैदावार की बढ़ जाएगी। पेट्रोलियम और एडिबल ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ, अनाज पैदावार की लागत बढ़ने से देश में खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
4. कोयला
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 55 प्रतिशत कोयला से पूरा करता है। भारत में जितना कोल खपत होता है, उसका 75 फीसदी हिस्सा पावर यूटिलिटीज करती है। जून 2022 में भारत में 676 करोड़ डॉलर का कोयला इंपोर्ट किया, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है। यह पिछले साल इसी महीने में आयात किए गए 187 करोड़ डॉलर के कोयले से करीब 260 फीसदी अधिक है। कोयले की इंपोर्ट लागत बढ़ने से बिजली की कीमत बढ़ सकती है। साथ ही इससे माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज जैसी गैर-बिजली यूजर्स के लिए इनपुट लागत बढ़ सकती है।
5. इलेक्ट्रॉनिक्स
विदेशों से इंपोर्ट होकर आने वाले इलेक्ट्रॉनिक आइटम, उपकरण और कंपोनेंट्स की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसमें मोबाइल फोन, रेफ्रिजरेटर और एयर कंडीशनर सहित अन्य प्रोडक्ट शामिल हैं। भारत ने जून 2022 में 610 करोड़ डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम इंपोर्ट किए थे, जबकि पिछले साल इसी महीने में 460 करोड़ डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स का इंपोर्ट हुआ था।
इन उत्पादों के अलावा प्लास्टिक आइट्मस, सोना, मोती और अन्य कीमती पत्थर, और केमिकल्स की कीमतों में भी रुपये में गिरावट के कारण बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
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