बिहार के कॉलेजों में 1 अप्रैल से नहीं होगी इंटरमीडिएट की पढ़ाई, शिक्षा विभाग ने जारी किया नोटिस

Bihar Education News: बिहार सरकार के इस कदम का उद्देश्य राज्य भर में उच्च माध्यमिक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच बढ़ाना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रों के लिए शैक्षिक बुनियादी ढांचे और अवसरों में सुधार होगा। इस साल अप्रैल में शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से अन्य विश्वविद्यालयों के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों में भी ये कक्षाएं बंद हो जाएंगी

अपडेटेड Feb 22, 2024 पर 5:11 PM
Bihar Education News: बिहार के कॉलेजों में 1 अप्रैल से इंटरमीडिएट की क्लासेस नहीं चलेंगी

Bihar Education News in Hindi: बिहार के कॉलेजों में अब इंटरमीडिएट की पढ़ाई नहीं होंगी। जी हां, बिहार सरकार ने राज्य के विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों में संचालित की जाने वाली इंटरमीडिएट (प्लस टू) कक्षाओं को बंद करने की घोषणा की है। राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने बुधवार देर शाम जारी एक अधिसूचना में कहा कि लगभग एक दशक पहले पटना विश्वविद्यालय में ऐसी कक्षाएं बंद कर दी गई थीं। लेकिन इस साल अप्रैल में शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से अन्य विश्वविद्यालयों के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों में भी ये कक्षाएं बंद हो जाएंगी।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अधिसूचना में कहा गया है कि नए सत्र से इंटरमीडिएट की शिक्षा (तीनों संकाय- कला, विज्ञान और वाणिज्य) अब केवल उच्च माध्यमिक विद्यालयों में ही दी जाएगी। विभाग ने यह भी कहा कि इंटरमीडिएट (प्लस टू) को कॉलेज से अलग करने की सिफारिश विश्वविद्यालय अधिनियम में की गई है। लेकिन उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अपर्याप्त बुनियादी ढांचे और कर्मियों की कमी के कारण इसे अब तक लागू नहीं किया जा सका था।

इस संबंध में पहले ही राज्य राजपत्र में संकल्प अधिसूचित किया जा चुका है। 2007 में तत्कालीन नीतीश कुमार सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986/92) के अनुरूप कॉलेजों से इंटरमीडिएट शिक्षा को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का नीतिगत निर्णय लिया था और '10+2' फॉर्मेट पेश किया था।


अधिसूचना में कहा गया है कि विभाग ने पहले से ही बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास किया है और एक विशेष अभियान के तहत उच्च माध्यमिक विद्यालयों के लिए 67,961 शिक्षकों और माध्यमिक विद्यालयों में अन्य 65,737 शिक्षकों की भर्ती की है।

सरकारी स्कूल अब इंटरमीडिएट शिक्षा को संभालने के लिए तैयार हैं। इससे पहले, बिहार सरकार ने प्रत्येक पंचायत में भी एक उच्च माध्यमिक विद्यालय खोलने का नीतिगत निर्णय लिया था और मौजूदा माध्यमिक विद्यालयों को उन्नत बनाया था।

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