अगले साल से नीट यूजी परीक्षा में कई तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Testing Agency – NTA) में सुधार को लेकर इसरो के पूर्व प्रमुख के राधाकृष्णन की अगुवाई में गठित उच्च स्तरीय कमेटी ने सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंप दी हैं। अगर केंद्र सरकार की ओर से इन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया तो परीक्षा में बड़े बदलाव देखने को मिल सकता है। इसमें सबसे अहम परीक्षा देने के मौकों पर है। मौजूदा समय में परीक्षा देने की कोई लिमिट नहीं है। यानी आप अपनी मर्जी से चाहे जितनी बार परीक्षाएं दें। लेकिन अब परीक्षा देने के अनगिनत मौकों को खत्म किया जा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीट यूजी परीक्षा को जेईई मेन की तर्ज पर करने की तैयारी चल रही है। ऐसे में अब छात्रों को परीक्षा देने के लिए अधिक से अधिक 4 मौके मिल सकते हैं। इससे छात्र ज्यादा गंभीरता के साथ मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करेंगे। नीट यूजी अटेंप्ट लिमिट बन जाने से स्टूडेंट्स की संख्या में भी गिरावट दर्ज की जाएगी।
आउटसोर्सिंग हो सकती है खत्म
फिलहाल NTA ने अभी तक अपनी सिफारिशों को पब्लिश नहीं किया है। लेकिन सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि अब परीक्षाओं के लिए आउटसोर्सिंग खत्म की जा सकती है। वहीं परीक्षा कराने के लिए केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय का चयन किया जा सकता है। मौजूदा समय में करीब हर जिले में एक नवोदय विद्यालय है। वहीं कई जिलों में केंद्रीय विद्यालय भी हैं। इसके अलावा दूसरे सरकारी संस्थानों को परीक्षा केंद्र बनाने का सुझाव दिया गया है। एनटीए में सुधार को लेकर गठित उच्चस्तरीय समिति अपनी सिफारिशें पिछले हफ्ते ही सुप्रीम कोर्ट को दे चुका है। हालांकि अभी इन सिफारिशों को एनटीए ने सार्वजनिक नहीं किया है।
पेपर लीक न हो, इसके लिए फुल प्रूफ प्लान
वहीं ये भी कहा जा रहा है कि कमेटी ने सभी परीक्षाओं को हाइब्रिड मोड में कराने की सिफारिश की है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले सालों में नीट यूजी परीक्षा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से कराई जा सकती है। परीक्षा का पेपर ऑनलाइन मिलेगा, जबकि सवाल के जवाब ओएमआर शीट पर पेन से भरना होगा। इससे प्रश्न पत्र के रास्ते या सेंटर से लीक होने की आशंका खत्म हो जाएगी।