यूक्रेन (Ukraine) में इंडिया के एमबीबीएस के हजारों स्टूडेंट्स हैं। इनमें से कुछ इंडिया लौट आए हैं। ज्यादातर अभी वहीं फंसे हैं। इन स्टूडेंट्स के फ्यूचर को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। उनकी आगे की पढ़ाई का क्या होगा, उनकी फीस का क्या होगा, क्या वे पड़ोसी देशों की दूसरी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जारी रख सकेंगे? मनीकंट्रोल ने इन सवालों के जवाब जानने के लिए स्टडी एब्रोड कंसल्टेंसी फर्म एमबीबीएस गुरुकुल के हेड नीरज चौरसिया से बात की। आइए जानते हैं इस बातचीत की प्रमुख बातें।
यूक्रेन से इंडिया लौटने वाले इंडियन स्टूडेंट्स के लिए आगे क्या विकल्प उपलब्ध हैं?
दो ऑप्शन हैं-पहला, उसी इंस्टीट्यूशन और यूनिवर्सिटी में कंटिन्यू किया जाए और कुछ महीनों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई की जाए। दूसरा, उन्हें पड़ोसी देशों और दूसरे यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर कराने का विकल्प दिया जाए। यूनिवर्सिटीज एंड स्टडी एब्रोड कंसल्टेंट्स उन्हें किर्गिजस्तान, उजबेकिस्तान और कजाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के मेडिकल कॉलेज में ट्रांसफर कराने में हेल्प कर सकते हैं। पड़ोसी देशों के मेडिकल कॉलेजों का एजुकेशन सिस्टम और फीस सिमिलर हैं।
क्या हमने पहले कभी ऐसी स्थिति का सामना किया है?
2014 में ऐसी स्थिति सामने आई थी। तब क्रीमिया को लेकर यूक्रेन और रूस आमने-सामने आ गए थे। तब कम से कम तीन मेडिकल कॉलेजों के स्टूडेंट्स के भविष्य को खतरा पैदा हो गया था। तब कई स्टूडेंट्स को दूसरी यूनिवर्सिटीज में ट्रांसफर कराया गया था। क्रीमिया फेडरल यूनिवर्सिटी के कुछ स्टूडेंट्स रूस भी गए थे।
इस साल यूक्रेन में पढ़ाई जारी रहने को लेकर आपका क्या अनुमान है?
जहां तक एजुकेशन की बात है तो हमारा मानना है कि स्थिति दो महीने में स्पष्ट हो जाएगी। मई और जून में यूनिवर्सिटीज छुट्टी का ऐलान करती हैं। स्टूडेंट्स तब घर आ जाते हैं। फिर वे सितंबर में कॉलेज लौटते हैं। अभी हर स्टूडेंट्स के लिए पहली प्राथमिकता जान बचाने की है। आम तौर पर यूएसएसआर का हिस्सा रहे देश ऐसे स्टूडेंट्स को अपने यहां अकोमोडेट कर लेते हैं।
यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई के लिए स्टूडेंट्स को कितनी फीस चुकानी पड़ती है?
मेडिकल एजुकेशन के लिहाज से यूक्रेन ज्यादा महंगा नहीं है। वहां कॉलेज पहले साल पूरे कोर्स की फीस स्टूडेंट्स से डिमांड नहीं करते हैं। पहले साल में स्टूडेंट्स 6 से 8 लाख रुपये के बीच चुकाते हैं। दूसरे साल से फीस और कम हो जाती है। इसका पेमेंट सेमेस्टर के आधार पर होता है।