Phd के लिए UGC ने दिए नए निर्देश, मिलेंगे अधिकतम 6 साल, ऑनलाइन और डिस्टेंस पर रोक, महिलाओं को मिली ये सुविधाएं

Phd: UGC के नए नियमों के तहत Phd डिग्री कोर्स कम से 3 साल की होगी। एडमिशन डेट से 6 साल तक का समय दिया जाएगा। वहीं कहा जा रहा है कि महिलाओं को 2 साल की छूट दी जा सकती है

अपडेटेड Nov 21, 2022 पर 9:04 AM
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नए नियम के तहत नौकरी कर रहे कर्मचारी या शिक्षक पार्टटाइम पीएचडी कर सकेंगे।

Phd: यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (University Grant Commission – UGC) की ओर से Phd (Doctor of Philosophy) कोर्स के लिए नई गाइडलाइंस जारी कर दी गई है। इस कोर्स की अवधि कम से कम तीन साल की होगी। नए नियमों के तहत पीएचडी के लिए एडमिशन डेट से ज्यादा से ज्यादा 6 साल का समय दिया जाएगा। कैंडिडिटेस् को री-रजिस्ट्रेशन के जरिए ज्यादा से ज्यादा दो साल का और समय दिया जाएगा। इस मामले में UGC का मानना है कि नए नियमों से अच्छे स्टूडेंस को फायदा होगा। वहीं उन्हें कम उम्र दाखिला मिल सकेगा।

महिलाओं और दिव्यांगों को 2 साल की छूट

ये भी कहा जा रहा है है कि नए नियमों के तहत महिलाओं और दिव्यांगों को 2 साल की छूट दी जाएगी। नौकरी कर रहे कर्मचारी या अध्यापक पार्टटाइम पीएचडी कर सकेंगे। पहले इन्हें पीएचडी करने के लिए स्टडी लीव लेना पड़ता था। नए नियम के तहत अगर कोई पीएचडी रिसर्चर री-रजिस्ट्रेशन कराता है। तब ऐसी स्थिति में ज्यादा से ज्यादा दो साल का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। इसके लिए शर्त ये होगी कि पीएचडी कार्यक्रम पूरा करने की कुल अवधि पीएचडी के एडमिशन डेट से 8 साल से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

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नए नियम के मुताबिक, ऑनलाइन या डिस्टेंस लर्निंग से पीएचडी नहीं कर सकते हैं। पहले थीसिस जमा कराने से पहले रिसर्च करने वाले छात्र को कम से कम 2 रिसर्च पेपर पत्रिकाओं में छपवाना पड़ता था। अब पीएचडी के नए नियमों में इसकी छूट दी गई है। रिसर्च की प्रक्रिया के दौरान दो रिसर्च पेपर छपवाने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। जैसे ही थिसिस जमा हो जाएगी तो यूनिवर्सिटी को 6 महीने के भीतर वायवा कराना होगा। पहले छात्र थिसिस जमा करने के बाद कई साल तक वायवा के लिए चक्कर काटते रहते थे।

महिलाओं को मिली ये सुविधा

यूजीसी के नए नियमों के तहत महिलाओं को काफी सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। पीएचडी कर रही महिला की अगर शादी हो जाती है और वो किसी दूसरे शहर में चली जाती हैं। तब ऐसी स्थिति में किसी भी संस्थान से पीएचडी कोर्स जारी रख सकती हैं। इसके लिए उन्हें अनुमति दी जाएगी। उन्हें बार-बार पीएचडी कोर्स पूरा करने के लिए अपने शहर नहीं भागना पड़ेगा। पीएचडी कराने वाले अध्यापकों के लिए कुछ नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अगर परमानेंट अध्यापक, जिनके रिटायरमेंट के 3 साल बचे हैं। वो नया रिसर्च के लिए नया रजिस्ट्रेशन नहीं करा सकते हैं। हालांकि वो को-गाइड के तौर पर 70 साल तक पीएचडी करा सकते हैं।

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