Lata Mangeshkar Death: जब बायोग्राफी लिखने के दौरान लेखिका ने स्वर कोकिला को किए 20 फोन कॉल, करीब एक साल तक चली बातचीत

Lata Mangeshkar को पिछले महीने Covid-19 पॉजिटिव पाए जाने के बाद ब्रीच कैंडी अस्पताल के ICU में भर्ती कराया गया था

अपडेटेड Feb 06, 2022 पर 3:09 PM
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लता मंगेशकर का आज सुबह 92 साल की उम्र में निधन हो गया

Lata Mangeshkar Biography: लता मंगेशकर, प्रसिद्ध गायिका और 'नाइटिंगेल ऑफ इंडिया' का आज सुबह 92 साल की उम्र में मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया। उन्हें पिछले महीने Covid-19 पॉजिटिव पाए जाने के बाद ब्रीच कैंडी अस्पताल की इंसेंटिव केयर यूनिट (ICU) में भर्ती कराया गया था।

भारत रत्न, पद्म विभूषण और पद्म भूषण पुरस्कार हासिल करने वाली, लता मंगेशकर भारतीय सिनेमा की एक प्रतीक थीं। 2009 में उनकी जीवनी, ब्रिटिश लेखिका और टेलीविजन डॉक्यूमेंट्री प्रोड्यूसर नसरीन मुन्नी कबीर द्वारा लिखी गई। "Lata Mangeshkar ...in Her Own Voice" 2009 में नियोगी बुक्स की तरफ से पब्लिश की गई थी।

किताब में लता मंगेशकर के करियर और जीवन की जानकारी है और मई 2008 से मार्च 2009 तक लेखक और गायक के बीच व्यापक बातचीत भी शामिल है।


दोनों के बीच फोन कॉल्स के जरिए 20 सेशन चले। अक्टूबर 2008 में लेखक के मुंबई आने के बाद, और बातचीत अगले साल मार्च तक जारी रही।

… जब लता मंगेशकर ने कहा, यह सौभाग्य की बात है कि मैं जो गाती हूं, लोग उसे पसंद करते हैं

नसरीन कबीर ने द हिंदू को दिए एक इंटरव्यू में किताब लिखने के अपने अनुभव के बारे में बताया, "यह बहुत चुनौतीपूर्ण नहीं था। लताजी की याददाश्त इतनी शानदार है। वह एक आकर्षक बातचीत करती हैं। बहुत बुद्धिमान हैं और वह बहुत विनम्र हैं। आपको उनसे वही बातें पूछने के लिए नए तरीके खोजने होंगे। आपको बहुत कुछ सोचना होगा। आप पहले से तैयार सवालों की लिस्ट के साथ उनसे बात नहीं कर सकते हैं और आप उनके जवाबों में हेरफेर नहीं कर सकते हैं।"

इस किताब को साहित्यिक आलोचकों की तरफ से खूब सराहा गया।

बिजनेस स्टैंडर्ड के किशोर सिंह ने किताब के बारे में कहा, "इसके जरिए आप लता मंगेशकर को और करीब से जान पाएंगे।"

1929 में एक संगीत परिवार में जन्मीं लता मंगेशकर पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं। 1942 में अपने पिता, शास्त्रीय संगीतकार पंडित दीनानाथ मंगेशकर की मृत्यु के बाद, लता मंगेशकर ने 13 साल की उम्र में अपने संगीत करियर की शुरुआत की।

उन्होंने कुछ मराठी फिल्मों के लिए संगीत भी तैयार किया, 1965 में फिल्म 'साधी मनसे' के लिए महाराष्ट्र सरकार का सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का पुरस्कार जीता।

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