ऑस्कर अवॉर्ड का ये है असली नाम, जीतने वालों का ट्रॉफी पर नहीं है हक, जानिए क्यों

Oscar 2023: फिल्मी दुनिया के प्रमुख पुरस्कारों में से एक ऑस्कर अवॉर्ड है। इस अवॉर्ड से जुड़ी कई ऐसी रोचक बातें हैं। जिन्हें सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। 95वें अकादमी अवॉर्ड्स का आयोजन आज 12 मार्च को होगा। लॉस एंजेलिस के डॉल्बी थिएटर में इस इवेंट को अकादमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज की ओर से आयोजित किया जाएगा। इस अवॉर्ड से जुड़ी हम आपको कुछ दिलचस्प बातें बता रहे हैं

अपडेटेड Mar 12, 2023 पर 12:11 PM
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ऑस्कर अवार्ड का ऑफिशियल नाम 'अकादमी अवॉर्ड ऑफ मेरिट' है। इसे अमेरिकन अकादमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेस (AMPAS) की और से दिया जाता है

Oscar 2023: फिल्मों की दुनिया के सबसे बड़े अवॉर्ड ऑस्कर की सेरेमनी भारतीय समय के अनुसार सोमवार सुबह 5.30 बजे से होगी। लॉस एंजलिस में ये फंक्शन रविवार रात 8 बजे शुरू होगा। इस बार भारत की तरफ से 3 नॉमिनेशन हैं। बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग के लिए फिल्म RRR का गाना नाटू-नाटू, डॉक्यूमेंट्री फीचर फिल्म की कैटेगरी में फिल्म ऑल दैट ब्रीथ्स और ओरिजिनल शॉर्ट फिल्म कैटेगरी में दी एलिफेंट व्हिस्परर्स को फाइनल नॉमिनेशन मिला है। हर बार की तरह इस बार भी सबकी नजरें नॉमिनेट होने वाली मूवी, एक्टर और एक्ट्रेसज पर टिकीं होंगी। लेकिन क्या आपको पता है इस अवॉर्ड को जीतने वाले लोगों का कभी ट्रॉफी पर मालिकाना हक नहीं होता है।

ऑस्कर को लेकर सवाल कई हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस अवॉर्ड का नाम ऑस्कर क्यों पड़ा इसे लेकर आज तक रहस्य है। खुद ऑस्कर कमेटी ने भी इसे कभी क्लियर नहीं किया। आइये जानते हैं कुछ रोचक तथ्य

ऑस्कर अवॉर्ड का आधिकारिक नाम


ऑस्कर अवार्ड का ऑफिशियल नाम 'अकादमी अवॉर्ड ऑफ मेरिट' है। यह पुरस्कार अमेरिकन अकादमी ऑफ़ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेस (AMPAS) द्वारा दिया जाता है। यह पुरस्कार फिल्म उद्योग में निर्देशकों, कलाकारों और लेखकों समेत प्रोफेशनल्स के बढ़िया काम को पहचान देने के लिए दिया जाता है। विश्व में होने वाले प्रमुख बड़े समारोहों में से ये एक है। ऑस्कर का सबसे पहला इवेंट 1929 में हॉलीवुड रूजवेल्ट होटल में आयोजित किया गया था। इस इवेंट के टिकट की कीमत 5 डॉसर थी। यह सिर्फ 15 मिनट तक ही चला था। इस अवॉर्ड में अब तक भारत की चार फिल्मों को जगह मिल चुकी है- मदर इंडिया, सलाम बॉम्बे, श्वास (मराठी) और लगान। साल 1957 से भारत की फिल्में ऑस्कर के लिए भेजी जा रही हैं।

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ट्रॉफी पर किसका हक?

ट्रॉफी के मालिकाना हक के बारे में बहुत कम लोगों को पता है कि ऑस्कर विजेता के पास उसकी ट्रॉफी का पूरा मालिकाना हक नहीं होता है। वो चाहकर भी अपनी ट्रॉफी कहीं बेच नहीं सकते हैं। अवॉर्ड दिए जाने से पहले विजेता से एक एग्रीमेंट साइन कराया जाता है कि वो अपनी ट्रॉफी को 1 डॉलर में अकादमी को ही बेचेंगे। अगर वो ऐसा करने से मना करते हैं तो वो ट्रॉफी अपने पास रखने के हकदार नहीं होते हैं। यह नियम 1950 से लागू है।

3 साल तक प्लास्टिक की बनी ट्रॉफी

ऑस्कर अवॉर्ड से जुड़ा एक अजीब फैक्ट और है। सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद मेटल की कमी हो गई थी। लिहाजा 3 साल तक ऑस्कर की ट्रॉफी को प्लास्टिक से बनाकर उस पर पेंट किया गया था।

ज्यूरी मेंबर्स

एकेडमी के पास इस समय करीब 10,000 मेंबर हैं। ये सभी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग ही हैं। एकेडमी गैर-फिल्मी लोगों को मेंबरशिप नहीं देती है। इसका मतलब है सिर्फ फिल्म बनाने वाले ही फिल्में अवॉर्ड के लिए चुनते हैं। ऑस्कर के इतिहास में केवल 3 लोग ही ऐसे हैं जिन्होंने ये अवॉर्ड लेने से मना कर दिया।

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