Government Spend in Election Year: अगले साल लोकसभा चुनाव होने वाले हैं और इस समय पांच राज्यों में चुनावी बिगुल बज रहा है। इन सबके बीच सरकार की योजना इस वित्त वर्ष 2023-24 की दूसरी छमाही में फूड और खाद सब्सिडी के साथ-साथ मनरेगा (MGNREGA) के लिए अधिक फंड जारी करने की है। हालांकि इससे वित्त वर्ष 2024 के लिए राजकोषीय घाटे का जो लक्ष्य है, वह पटरी पर ही रहेगा। एक सीनियर अधिकारी ने मनीकंट्रोल को सरकार की इस योजना के बारे में जानकारी दी। जानकारी के मुताबिक सब्सिडी पर अतिरिक्त खर्च के बावजूद सरकार को भरोसा है कि वित्त वर्ष 2023-24 में जीडीपी के 5.9 फीसदी के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य पूरा हो जाएगा।
राजकोषीय घाटे पर पड़ेगा सीमित प्रभाव
अधिकारी के मुताबिक राजकोषीय घाटे में कोई बड़ा फर्क नहीं आएगा क्योंकि हाई सब्सिडी का फर्क सिर्फ तीन महीने के लिए ही होगा। वहीं इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में खर्चों की स्पीड थोड़ी धीमी थी। अधिकारी के मुताबिक मुफ्त खाद्यान्न योजना की मियाद आगे बढ़ाए जाने के केंद्र के फैसले का वित्त वर्ष 2024 के लिए राजकोषीय घाटे पर सीमित प्रभाव पड़ेगा। तीन महीने के विस्तार के चलते 15 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 नवंबर मुफ्त खाद्यान्न कार्यक्रम को पांच साल तक बढ़ाने की योजना का खुलासा किया। यह घोषणा अप्रैल या मई 2024 के आसपास होने वाले आम चुनावों से पहले की गई है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) नामक इस मुफ्त खाद्यान्न योजना के तहत गरीब परिवारों को बहुत सस्ती दरों पर प्रति व्यक्ति प्रति माह पांच किग्रा अनाज मिलता है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 300 रुपये में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराने की लागत पर 3,840 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा, जबकि भारत आटा योजना के तहत गेहूं का आटा 27.50 रुपये प्रति किग्रा की रियायती दर पर बेचने का सरकारी खर्च पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके अलावा अधिकारी ने बताया कि शहरी आवास सब्सिडी योजना जल्द ही लॉन्च होने वाली है, जिससे वित्त वर्ष 2024 में तीन महीने की अवधि में 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। इस योजना पर पांच साल में 60,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
बजट में कितना था प्रावधान
सरकार ने फूड सब्सिडी के लिए 1.97 लाख करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान किया था जबकि बजट में खाद सब्सिडी का टारगेट 1.75 लाख करोड़ रुपये का रखा गया था। वहीं इस वित्त वर्ष 2023-24 में मनरेगा के लिए 60 हजार करोड़ रुपये अलॉट हुए थे जबकि पिछले वित्त वर्ष 89400 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में केंद्र सरकार ने बजटेड रेवेन्यू का 52.2 फीसदी हासिल कर लिया लेकिन खर्च अनुमान के आधे से भी कम करीब 47.1 फीसदी रहा। वहीं अप्रैल-सितंबर में राजकोषीय घाटा बढ़कर 7.02 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पूरे साल के लक्ष्य 17.87 लाख करोड़ रुपये का 39.3 फीसदी है।
अतिरिक्त खर्च कैसे होगा कवर
अधिकारी के मुताबिक टैक्स कलेक्शन से होने वाले मुनाफे से इस वित्त वर्ष 24 में होने वाले अतिरिक्त खर्च को कवर करने में मदद मिलेगी। सितंबर में सरकार का नेट टैक्स रेवेंयू सालाना आधार पर 14.3 फीसदी बढ़कर 3.56 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसका कारण कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन 26.6 फीसदी उछलकर 2.12 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि पर्सनल इनकम टैक्स कलेक्शन 15.6 फीसदी बढ़कर 91,247 करोड़ रुपये हो गया। इससे सितंबर में कुल रिसीट्स 9.3 फीसदी बढ़ गईं।
कर्ज को लेकर क्या है स्थिति
अधिकारी ने बताया कि केंद्र के पास नगदी पर्याप्त मात्रा में है लेकिन फिर भी बॉन्ड मार्केट से कर्ज से जुड़े कार्यक्रम जारी रहेंगे ताकि मार्केट को झटका न लगे। पिछले हफ्ते सरकार के पास 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की नगदी मौजूद थी और इस वित्त वर्ष के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करना सरकार के अहम एजेंडे में है। वित्त मंत्रालय ने 26 सितंबर ऐलान किया था कि वह अपने बजट लक्ष्य के अनुरूप चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में डेटेड सिक्योरिटीज की बिक्री के जरिए 6.55 लाख करोड़ रुपये उधार लेगी। इसमें 20,000 करोड़ रुपये के ग्रीन बॉन्ड शामिल होंगे।
केंद्र अपने राजकोषीय घाटे को बॉन्ड मार्केट से उधारी, स्मॉल सेविंग्स से प्राप्त आय और कैश बैलेंस से निकासी के जरिए पूरा करता है। वित्त वर्ष 2023-24 में केंद्र सरकार की योजना बॉन्ड्स की बिक्री के जरिए ग्रॉस बेसिस पर 15.43 लाख करोड़ रुपये का कर्ज जुटाने की है। इसमें से 8.88 लाख करोड़ रुपये इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में जुटाए जा सके हैं।