लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए भारत ने कनाडा से किया था अनुरोध, लेकिन ट्रूडो सरकार ने नहीं की कोई कार्रवाई

India-Canada Row: भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार (17 अक्टूबर) को कहा कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े सिंडिकेटों के प्रत्यर्पण के लिए हाल ही में अनुरोध किए गए थे, लेकिन कनाडा ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि कनाडा को वहां पोषित की जा रही भारत विरोधी गतिविधियों को स्मरण कराते रहे हैं

अपडेटेड Oct 17, 2024 पर 6:33 PM
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India-Canada Row: विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत द्वारा किए गए 26 प्रत्यर्पण अनुरोध कनाडा के पास लंबित है

India-Canada Row: भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार (17 अक्टूबर) को बताया कि भारत ने कुछ साल पहले गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्यों के प्रत्यर्पण की मांग कनाडा से की थी, लेकिन जस्टिन ट्रूडो ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। भारत का कहना है कि प्रत्यर्पण अनुरोध के बावजूद कनाडा लॉरेंस बिश्नोई गैंग के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि कनाडा को वहां पोषित की जा रही भारत विरोधी गतिविधियों को स्मरण कराते रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा गैंगस्टरों और आतंकवादियों के लिए किए गए 26 प्रत्यर्पण अनुरोध कनाडा के पास अभी भी लंबित है।

विदेश मंत्रालय ने प्रत्यर्पण के लिए गुरजीत सिंह, गुरजिंदर सिंह, अर्शदीप सिंह गिल, लखबीर सिंह लांडा, गुरप्रीत सिंह के नाम दिए। उन्होंने कहा कि इनमें बिश्नोई गैंग (Lawrence Bishnoi Gang) के सदस्य भी शामिल हैं। वहीं, खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर (Khalistani terrorist Hardeep Singh Nijjar) की हत्या में भारत सरकार के एजेंटों के शामिल होने के आरोपों पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि कनाडा ने इस बारे में अब तक एक भी सबूत साझा नहीं किया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमने लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के लोगों की गिरफ्तारी के लिए कनाडाई पक्ष से कुछ साल पहले और हाल में भी अनुरोध किया था। उन्होंने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। किसी को गिरफ्तार नहीं किया है। वे (कनाडा सरकार) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का बहाना देकर ऐसे अलगाववादी ताकतों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे। उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की है और इसके पीछे राजनीतिक मकसद भी है।"


वहीं, भारत-कनाडा विवाद पर रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमने इस विशेष मामले पर अपनी स्थिति बहुत स्पष्ट कर दी है। आपने देखा होगा कि पिछले दो दिनों में कई प्रेस विज्ञप्तियां जारी की गई हैं, जिनमें हमारी स्थिति स्पष्ट की गई है कि सितंबर 2023 से कनाडा सरकार ने हमारे साथ कोई भी जानकारी साझा नहीं की है। कल फिर से सार्वजनिक जाँच के बाद एक बयान जारी किया गया जिसमें कनाडा ने गंभीर आरोप लगाए हैं। लेकिन अभी तक इसे साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं दिया है। हम अपने राजनयिकों के खिलाफ झूठे आरोपों को खारिज करते हैं।"

भारत सरकार का यह बयान कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम लिए जाने के एक दिन बाद आया है। गैंगस्टर का उल्लेख रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने पिछले साल सितंबर में निज्जर की हत्या में शामिल होने के लिए किया था। ट्रूडो ने आरोप लगाया कि भारतीय राजनयिक कनाडाई लोगों के बारे में जानकारी एकत्र कर रहे थे और इसे लॉरेंस बिश्नोई गिरोह को दे रहे थे। ट्रूडो ने दावा किया कि कनाडाई एजेंसियों ने निज्जर की हत्या में आरोपों को सार्वजनिक करने से पहले भारत के साथ पर्दे के पीछे काम करने की कोशिश की थी।

ट्रूडो ने माना- भारत पर आरोप लगाते वक्त उनके पास ठोस सबूत नहीं थे

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने बुधवार (16 अक्टूबर) को स्वीकार किया कि जब उन्होंने पिछले साल खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार के एजेंटों की संलिप्तता का आरोप लगाया था, तब उनके पास केवल खुफिया जानकारी थी और कोई "ठोस सबूत" नहीं था। संघीय चुनावी प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं में विदेशी हस्तक्षेप की सार्वजनिक जांच के सिलसिले में ट्रूडो ने गवाही देते समय यह बात कही।

ट्रूडो ने इस दौरान दावा किया कि भारतीय राजनयिक कनाडा के उन लोगों के बारे में जानकारी एकत्र कर रहे थे जो पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार से असहमत हैं। इसे भारत सरकार के उच्चतम स्तर तक और लॉरेंस बिश्नोई गिरोह जैसे आपराधिक संगठनों तक पहुंचा रहे थे।

ट्रूडो ने कहा, "मुझे इस तथ्य के बारे में जानकारी दी गई कि कनाडा और संभवतः 'फाइव आईज' सहयोगियों से खुफिया जानकारी मिली है, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत इसमें शामिल था...भारत सरकार के एजेंट कनाडा की धरती पर कनाडा के नागरिक की हत्या में शामिल थे।" कनाडा के प्रधानमंत्री ने कहा कि यह ऐसी चीज है जिसे उनकी सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया।

'फाइव आईज' नेटवर्क पांच देशों का एक खुफिया गठजोड़ है जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूजीलैंड शामिल हैं। ट्रूडो ने कहा, "भारत ने वास्तव में ऐसा किया, और हमारे पास यह मानने के कारण हैं कि उन्होंने ऐसा किया।" प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का तात्कालिक दृष्टिकोण भारत सरकार के साथ मिलकर इस पर काम करना है, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

ट्रूडो ने लॉरेंस बिश्नोई को भारतीय राजनयिक से जोड़ा

ट्रूडो ने आरोप लगाया कि भारतीय राजनयिक कनाडा के उन लोगों के बारे में जानकारी एकत्र कर रहे थे जो पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार से असहमत थे, और उस जानकारी को भारत सरकार के उच्चतम स्तर तक और बिश्नोई गिरोह जैसे आपराधिक संगठनों तक पहुंचा रहे थे। उन्होंने कहा कि यह आरसीएमपी का दृढ़ निश्चय था कि वह उस कड़ी, या उस क्रम, उस साजिश का पर्दाफाश करके सारी चीजें सार्वजनिक करेगी।

रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) ने सोमवार को कहा था कि उसके पास सबूत हैं कि जून 2023 में निज्जर की हत्या की कथित साजिश में छह भारतीय राजनयिक शामिल थे। आरसीएमपी ने यह भी आरोप लगाया कि बिश्नोई गिरोह भारत सरकार के एजेंटों से जुड़ा हुआ है, जो देश में विशेष रूप से खालिस्तानी समर्थक तत्वों को निशाना बना रहा है।

भारत ने कनाडा के अधिकारियों द्वारा भारतीय एजेंटों को कनाडा में आपराधिक गिरोहों से जोड़ने के प्रयासों को दृढ़ता से खारिज कर दिया। भारत ने कनाडा के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि उसने निज्जर मामले में भारत से सबूत साझा किए हैं। नई दिल्ली में सूत्रों ने ट्रूडो के पिछले आरोपों को भी खारिज कर दिया कि भारत कनाडाई नागरिकों को उनके देश में निशाना बनाने के लिए गुप्त अभियान चलाने सहित अन्य गतिविधियों में शामिल था।

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भारत ने कनाडा के छह राजनयिकों को निष्कासित कर दिया और निज्जर की हत्या की जांच से राजदूत को जोड़ने के आरोपों को खारिज करने के बाद कनाडा से अपने उच्चायुक्त को वापस बुलाने की घोषणा की। निज्जर की पिछले साल जून में ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

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