शिंजियांग के मुसलमानों पर चीनी अत्याचार के खिलाफ भारत ने वोट क्यों नहीं किया? विदेश मंत्रालय ने दिया ये जवाब

चीन के अशांत क्षेत्र शिंजियांग प्रांत में मानवाधिकारों के उल्लंघन के मुद्दे पर गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद यानी UNHRC में बहस का एक प्रस्ताव लाया गया था। भारत ने इस मुद्दे पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया

अपडेटेड Oct 07, 2022 पर 8:50 PM
चीन के खिलाफ मतदान में भारत के अनुपस्थित रहने को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार की आलोचना की है

चीन के अशांत क्षेत्र शिंजियांग में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में एक चर्चा कराने से जुड़े मसौदा प्रस्ताव पर मतदान में भारत के अनुपस्थित रहने को लेकर विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया है।

भारत ने शुक्रवार को कहा कि शिंजियांग क्षेत्र में मानवाधिकार की स्थिति पर चर्चा के लिए UNHRC में एक मसौदा प्रस्ताव पर मतदान में भाग नहीं लेना ‘देश विशिष्ट प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लेने के उसके दीर्घकालिक चलन पर आधारित है।

आपको बता दें कि भारत ने शिंजियांग क्षेत्र में मानवाधिकार की स्थिति पर चर्चा के लिए UNHRC में एक मसौदा प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया था। भारत सरकार के इस कदम की विपक्षी पार्टियों द्वारा आलोचना किए जाने के बाद विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर सफाई दी है।


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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने शुक्रवार को साप्ताहिक प्रेस वार्ता में पत्रकारों से कहा कि यह किसी देश विशिष्ट प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लेने के उसके दीर्घकालिक चलन पर आधारित है।

मुस्लिम देशों ने चीन के पक्ष में किया मतदान

47 सदस्यीय परिषद में यह मसौदा प्रस्ताव खारिज हो गया, क्योंकि 17 सदस्यों ने पक्ष में तथा चीन सहित 19 देशों ने मसौदा प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। भारत, ब्राजील, मैक्सिको और यूक्रेन सहित 11 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। मसौदा प्रस्ताव का विषय था- ‘‘चीन के शिंजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति पर चर्चा।’’

मसौदा प्रस्ताव कनाडा, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, ब्रिटेन और अमेरिका के एक कोर ग्रुप द्वारा पेश किया गया था। तुर्की सहित कई देशों ने इसे सह-प्रायोजित किया था। चीन में उइगर और अन्य मुस्लिम बहुल समुदायों के खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन के गंभीर आरोपों को 2017 के अंत से संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार तंत्र के ध्यान में लाया जाता रहा है।

भारत के रुख को लेकर विपक्ष ने की सरकार की आलोचना

चीन के खिलाफ मतदान में भारत के अनुपस्थित रहने को लेकर विपक्षी दलों ने शुक्रवार को सरकार की आलोचना की। विपक्षी दलों ने कहा कि जो सच है, उस बारे में भारत को बोलना चाहिए और अपने पड़ोसी देश से डरना नहीं चाहिए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं लोकसभा सदस्य मनीष तिवारी ने हैरानी जताते हुए कहा कि चीन पर काफी झिझक वाला रुख है।

उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ‘‘भारत सरकार चीनी घुसपैठ पर संसद में चर्चा कराने के लिए सहमत नहीं होगी। शिंजियांग में मानवाधिकारों पर चर्चा के लिए एक प्रस्ताव पर यूएनएचआरसी में भारत अनुपस्थित रहेगा।’’ तिवारी ने आरोप लगाया कि विदेश मंत्रालय ताइवान का दौरा करने के लिए सांसदों को मंजूरी नहीं दे रहा है।

वहीं, ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने उइगर मुद्दे पर यूएनएचआरसी में चीन की मदद करने संबंधी भारत के फैसले का कारण प्रधानमंत्री मोदी से जानना चाहा है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘क्या (चीन के राष्ट्रपति) शी चिनफिंग को नाराज करने से वह इतना डरते हैं कि भारत सच बात नहीं बोल सकता है?’’

शिवसेना की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘लाल आँख से लेकर बंद आँख तक का सफ़र।’’ मानवाधिकार संगठन चीन के संसाधन संपन्न उत्तर-पश्चिमी प्रांत में (मानवाधिकार हनन की) घटनाओं को लेकर सालों से आवाज उठा रहे हैं।

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