इंडिया 2028 तक दुनिया की तीसरी बड़ी इकोनॉमी बन जाएगा, 5.7 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी अर्थव्यवस्था

मॉर्गन स्टेनली ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ग्लोबल जीडीपी में इंडिया की हिस्सेदारी बढ़ रही है। इंडिया में इकोनॉमिक स्टैबिलिटी है। सरकार का फोकस रिफॉर्म्स पर है। इससे इकोनॉमी की ग्रोथ भविष्य में तेज बनी रहने की उम्मीद है

अपडेटेड Mar 15, 2025 पर 1:27 PM
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1990 में इडिया इकोनॉमी के मामले में 12वें पायदान पर था। 2000 में यह गिरकर 13वें पायदा पर चला गया था।

इंडिया साल 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएगा। मॉर्गन स्टेनली ने अपनी हालिया रिपोर्ट में यह अनुमान जताया है। उसने रिपोर्ट में कहा है कि इंडिया 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे इकोनॉमी बनने के रास्ते पर है। ग्लोबल प्रोडक्शन में इंडिया की हिस्सेदारी बढ़ रही है। इंडिया में पॉलिसी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस के साथ ही माइक्रो स्टैबिलिटी दिख रही है। इंडिया अगले तीन साल में जर्मनी को पीछे छोड़ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएगा।

2028 में 5.7 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी इंडियन इकोनॉमी

मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 तक इंडियन इकोनॉमी (Indian Economy) के 4.7 लाख करोड़ डॉलर (ट्रिलियन) की हो जाने की उम्मीद है। इससे दुनिया में यह चौथे पायदान पर आ जाएगा। सिर्फ तीन इकोनॉमी दुनिया में इंडिया से बड़ी रह जाएंगी। इनमें अमेरिकी, चीन और जर्मनी शामिल हैं। साल 2028 तक इंडिया जर्मनी से आगे निकल जाएगा। तब इंडिया की इकोनॉमी बढ़कर 5.7 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी। 2023 में इंडियन इकोनॉमी 3.5 लाख करोड़ डॉलर की थी।


1990 में दुनिया में 12वें पायदान पर थी इंडिया की इकोनॉमी

इस रिपोर्ट के मुताबिक, 1990 में इडिया इकोनॉमी के मामले में 12वें पायदान पर था। 2000 में यह गिरकर 13वें पायदा पर चला गया था। 2020 में यह 9वें पायदान पर आया। 2023 में यह 5वें पायदान पर आ गया। 2029 तक ग्लोबल जीडीपी में इंडिया की हिस्सेदारी बढ़कर 4.5 फीसदी पहुंच जाने की उम्मीद है। अभी ग्लोबल जीडीपी में इंडिया की हिस्सेदारी 3.5 फीसदी है। इस रिपोर्ट में इंडिया की ग्रोथ के लिए तीन स्थितियों का अनुमान जताया गया है। पहली स्थिति बेयर की है, जिसमें इकोनॉमी 2035 तक बढ़कर 6.6 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी।

इन वजहों से तेजी से बढ़ रही है इंडियन इकोनॉमी 

दूसरी स्थिति में इंडिया की इकोनॉमी बढ़कर 8.8 लाख करोड़ डॉलर की हो सकती है। तीसरी स्थिति बुल की है, जिसमें इंडियन इकोनॉमी बढ़कर 10.3 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी। मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल आउटपुट में इंडिया की हिस्सेदारी अगले दशक में बढ़ेगी। इसकी कई वजहें हैं। इंडिया में आबादी बढ़ रही है। लोकतत्र मजबूत है। बेहतर पॉलिसी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस से स्टैलिबिलिटी बनी हुई है। देश में आंत्रपेन्योर्स की संख्या बढ़ रही है। सामाजिक मानकों पर भी इम्प्रूवमेंट दिख रहा है।

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