Indian Railway: देश की ये हैं सबसे पुरानी ट्रेनें, 150 साल से पटरियों पर भर रही हैं फर्राटा, जानिए खासियत

Indian Railway: भारत में रेल का इतिहास 160 साल से ज्यादा पुराना है। हमारे देश की पहली ट्रेन रेड हिल रेलवे 1837 में और पहली यात्री रेल 16 अप्रैल 1853 को चली थी। कई ऐसी ट्रेनें हैं जो भारत की रेल पटरियों पर 150 साल से ज्यादा समय से अभी भी चल रही हैं

अपडेटेड Jun 01, 2023 पर 6:38 PM
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Indian Railway: देश की पहली ट्रेन रेड हिल रेलवे 1837 में और पहली यात्री रेल 16 अप्रैल 1853 को चली थी।

Indian Railway: भारतीय रेलवे का इतिहास काफी साल पुराना है। हजारों की संख्या में चलने वाली देश की ट्रेनें 150 साल से भी ज्यादा समय से आज पटरियों पर दौड़ रही हैं। आज के टाइम की टेक्नोलॉजी के हिसाब से वंदे भारत एक्सप्रेस कई रिकॉर्ड बना रही होगी। लेकिन उस समय के दौर की ट्रेनें कुछ और ही हुआ करती थीं, उनकी खासियत के चलते लोग आज भी उनकी तारीफ कर देते हैं। भारत में रेल का इतिहास 160 साल से ज्यादा पुराना है। आजादी के बाद भारतीय रेल ने देश को नए रूप में गढ़ा है। 1.2 लाख किलोमीटर के रेल नेटवर्क के साथ भारत दुनिया में चौथे स्थान पर है।

हमारे देश की पहली ट्रेन रेड हिल रेलवे थी, जो 1837 में रेड हिल्स से चिंताद्रिपेट पुल तक 25 किलोमीटर चली थी। सर आर्थर कॉटन ने इस ट्रेन को बनाया था। इसका उपयोग खासतौर से ग्रेनाइट के परिवहन के लिए किया जाता था। 1847 में ईस्ट इंडिया कंपनी और ग्रेट पेनिनसुला रेलवे ने मिलकर 56 किलोमीटर का बॉम्बे से ठाणे तक लम्बा ट्रैक बनाया था। इसके बाद भारत की पहली सवारी रेलगाड़ी चली थी। 16 अप्रैल 1853 को बोरीबंदर (बॉम्बे) से ठाणे 34 किलोमीटर तक पैसेंजर ट्रेन चली थी। आइए रेलवे की सबसे पुरानी ट्रेनों के बारे में जानते हैं।

पंजाब मेल (1 जून 1912)


पंजाब मेल (Punjab Mail​) इंडियन रेलवे की सबसे पुरानी और लंबी दूरी वाली ट्रेनों में से एक है। इस ट्रेन को पहले पंजाब लिमिटेड के नाम से जाना जाता था। 1 जून 2022 को इस ट्रेन के 110 साल पूरे हुए थे। आज ही के दिन यह ट्रेन चली थी। अब इसे 111 साल पूरे हो गए। सबसे खास बात ये है कि आजादी के पहले शुरू की गई ये ट्रेन आज भी पटरियों पर दौड़ रही है। किसी जमाने में इस ट्रेन को ब्रिटिश भारत में सबसे तेज ट्रेन होने का खिताब हासिल था। पहले यह ट्रेन बाम्बे से पेशावर (अब पाकिस्तान में) तक जाती थी। पंजाब मेल अभी सेंट्रल रेलवे जोन में आती है। अब यह मुंबई से पंजाब के फिरोजपुर तक जाती है।

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फ्रंटियर मेल (1 सितंबर 1928)

फ्रंटियर मेल ने भी भारत का बंटवारा देखा है। ये ट्रेन पंजाब मेल शुरू होने करीब 16 साल बाद चलाई गई थी। 1930 में द टाइम्स ऑफ लंदन ने ब्रिटिश राज में चलने वाली सबसे फेमस ट्रेनों में से एक के रूप बताया था। साल 1934 में इस ट्रेन में एसी लगाया गया था। भारत की ये पहले एसी बोगी वाली ट्रेन बन गई थी। आजादी के बाद ये सिर्फ मुंबई से दिल्ली होते हुए अमृतसर जाती है। सितंबर 1996 में फ्रंटियर मेल का नाम बदलकर 'गोल्डन टेम्पल एक्सप्रेस' कर दिया गया।

ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस (1 अप्रैल 1929)

जीटी एक्सप्रेस या ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस (Grand Trunk Express) भी भारत की सबसे पुरानी ट्रेनों में से एक है। शुरुआत में यह पेशावर से मैंगलोर तक चलती थी और इसकी पूरी यात्रा में लगभग 104 घंटे का समय लगता था। यह देश के सबसे लंबे रेलमार्गों में शामिल था। बाद में इसकी सर्विस को लाहौर-मेट्टुपलायम तक बढ़ा दिया गया। मौजूदा समय में यह नई दिल्ली से चेन्नई के बीच चल रही है।

बॉम्बे पूना मेल (21 अप्रैल 1863)

बॉम्बे-पूना मेल (Bombay Pune Mail) 1869 में पहली बार चली थी। यह मुंबई और पुणे के बीच शुरू हुई पहली इंटरसिटी ट्रेन थी। माना जाता है कि यह ट्रेन रॉयल मेल ले जाने वाली और ब्रिटिश साम्राज्य की बेहतरीन ट्रेनों में से एक थी।

कालका मेल (1 जनवरी 1866)

कालका मेल (Kalka Mail) भी भारतीय रेलवे के इतिहास में सबसे पुरानी ट्रेन है। इस ट्रेन ने पिछले साल 156 वर्ष पूरे किए थे। ये ट्रेन 1886 में 1 अप और 2 डाउन नंबर प्लेट के प्लेट साथ "ईस्ट इंडियन रेलवे मेल" के नाम के साथ पटरी पर दौड़ना शुरू हुई थी।

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