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Indian Railways: वेटिंग टिकट भी एक झटके में हो जाएगी कन्फर्म, सिर्फ करना है ये काम

Indian Railways: रेल टिकट बुक करते समय यह कोई जरूरी नहीं है कि टिकट कन्‍फर्म हो जाएगा। वैसे ट्रेन में कई तरह के कोटा होते हैं। ऐसे ही एक कोटा HO होता है। इसके जरिए वेटिंग लिस्ट के टिकट भी आसानी से कन्फर्म हो जाते हैं। इस कोटा में वेटिंग लिस्ट कितनी भी लंबी हो। इस पर कोई फर्क नहीं पड़ता है

MoneyControl Newsअपडेटेड May 22, 2023 पर 4:14 PM
Indian Railways: वेटिंग टिकट भी एक झटके में हो जाएगी कन्फर्म, सिर्फ करना है ये काम
HO Quota का इस्तेमाल टिकट बुक करते समय नहीं किया जाता है। बल्कि नॉर्मल टिकट लेकर बाद में अप्लाई किया जाता है

Indian Railways: भारतीय रेल में हर रोज लाखों लोग सफर करते हैं। भरतीय रेलवे की बहुत-सी सेवाएं अब ऑनलाइन उपलब्‍ध हैं. इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्‍म कॉर्पोरेशन (IRCTC) की वेबसाइट और ऐप की मदद से भी यात्री बहुत-सी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। जिनमें टिकट बुकिंग से लेकर खाना बुक करना भी शामिल है। ऐसे ही जब भी आप ट्रेन में टिकट बुक करते हैं तो अलग-अलग कोटा के जरिए बुकिंग होती है। जिन लोगों का स्पेशल कोटा होता है। उन्हें सीट मिलने में भी प्राथमिकता दी जाती है। जैसे सीनियर सिटीजन के लिए अलग कोटा होता है। उन्हें सीट अलॉटमेंट में प्राथमिकता दी जाती है।

कल मिलाकर इस तरह के कई कोटे होते हैं। ऐसे ही एक कोटा HO कोटा होता है। इसे कोटे की खास बात ये है कि इसमें वेटिंग लिस्ट भी कंफर्म हो जाती है। इसे (Head Quarters) या हाई ऑफिशियल ( High Official Quota) कोटा भी कहा जाता है।

क्या होता है HO कोटा

इस कोटे का इस्तेमाल टिकट बुकिंग के समय नहीं किया जाता है। इसमें पहले सामान्य वेटिंग लिस्ट वाली टिकट लेना होता है। इसे टिकट हेड क्वार्टर के जरिए कंफर्म कराया जाता है। ये कोटा इमरजेंसी में यात्रा करने वाले लोगों के लिए और VIP लोगों के लिए होता है। अधिकतर VIP लोगों को ही इसका फायदा मिलता है। लेकिन कुछ परिस्थिति में नॉर्मल लोग भी इसका फायदा उठा सकते हैं। ये कोटा सिर्फ रेलवे के उच्च अधिकारियों, सरकारी गेस्ट, VIP, मंत्रालय के गेस्ट आदि के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें वेटिंग टिकट को कंफर्म कर दिया जाता है। इसका प्रोसेस भी चार्ट बनने के कुछ घंटे पहले ही होता है। एचओ कोटे में ट्रेन के आधार पर सीट होती हैं। आमतौर पर इनकी संख्या बहुत कम होती है और ट्रेन के हिसाब से सीटों की संख्या की समीक्षा की जाती है।

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