Joshimath Sinking Updates: सेना की 25 बिल्डिंगों में दरार, शिफ्ट किए गए जवान, अमित शाह ने की हाई लेवल मीटिंग
Joshimath Sinking Updates: CM पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार देर रात इलाके में राहत कैंप का दौरा किया और वहां लाए गए प्रभावित लोगों से बातचीत की। उनका यह दौरा ऐसे समय में हुआ, जब लोग अपने घरों को तोड़े जाने से पहले मुआवजे की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे
Joshimath Sinking Updates: सेना की 25 बिल्डिंगों में दरार, शिफ्ट किए गए जवान
Joshimath Sinking Updates: जोशीमठ (Joshimath) के डूबते शहर में जमीन का धंसना (Land subsidence) एक बड़ी समस्या बनी हुई है। अब तक 131 परिवारों को उनके घरों से निकाल दिया गया है, क्योंकि उनमें दरारें (Cracks in Houses) आ गई थीं और उन्हें "अनसेफ" बताया गया था। कुछ समय पहले उत्तराखंड सरकार की तरफ से सभी निर्माण कार्यों (Constructions Work) पर रोक लगा दी गई थी और 723 इमारतों को जोखिम के अंदर बताया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार देर रात इलाके में राहत कैंप का दौरा किया और वहां लाए गए प्रभावित लोगों से बातचीत की। उनका यह दौरा ऐसे समय में हुआ, जब लोग अपने घरों को तोड़े जाने से पहले मुआवजे की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
गुरुवार की सुबह भी वे जोशीमठ में थे और मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, 'मैंने ईश्वर से सभी को इस समस्या से बचाने की प्रार्थना की है। हम सभी को विश्वास होना चाहिए कि हमारा जोशीमठ इससे बाहर निकलेगा।"
धामी ने कहा कि प्रभावित लोगों को 1.5 लाख रुपए की अंतरिम मदद दी जा रही है और राहत और पुनर्वास का ब्योरा तैयार किया जा रहा है। बाजार दर के अनुसार, मुआवजा दिया जाएगा, जिसका निर्धारण सभी हितधारकों को विश्वास में लेकर किया जाएगा।
अब तक ये फैसला लिया गया है कि दो होटलों - मलारी इन और माउंट व्यू - को ध्वस्त कर दिया जाएगा, क्योंकि इसकी दीवारों में बड़ी दरारें आ गई हैं और वे एक-दूसरे की ओर झुकी हुई हैं।
Joshimath Sinking Latest Updates:
- चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में जोशीमठ डूब संकट मामले की सुनवाई की। दायर याचिका, जोशीमठ में जमीन धंसने के मुद्दे को "प्राकृतिक आपदा" घोषित करने की मांग करती है।
- जोशीमठ में सेना के करीब 25 से 28 इंफ्रास्ट्क्चर प्रभावित हैं। सीएम धामी ने कहा कि जवानों को शिफ्ट कर दिया गया है और नागरिक प्रशासन को भी आश्रय दिया गया है।
- जोशीमठ में बाइपास सड़क का काम ठप पड़ा है। आर्मी चीफ जनरल मनोड पांडे ने कहा, “आगे के क्षेत्रों और परिचालन तत्परता के लिए हमारी पहुंच प्रभावित नहीं हुई है। हम स्थानीय प्रशासन को हर संभव मदद करेंगे।"
- एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा है कि CSIR-नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (NGRI) के एक्सपर्ट की एक टीम उत्तराखंड के जोशीमठ के लिए रवाना होगी।
- सीएम धामी ने भूस्खलन से प्रभावित परिवारों को अंतरिम पैकेज और पुनर्वास पैकेज के पारदर्शी वितरण की दर तय की। प्रभावित लोगों को 1.5 लाख रुपए की अंतरिम सहायता दी जा रही है और राहत और पुनर्वास का ब्यौरा तैयार किया जा रहा है।
- चमोली डीएम हिमांशु खुराना ने कहा कि जोशीमठ में प्रभावित लोगों को तत्काल अंतरिम सहायता के पारदर्शी वितरण और पुनर्वास पैकेज की दर तय करने के लिए 11 सदस्यों की एक समिति बनाई गई है।
- ANI की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर, विशेष पुनर्वास पैकेज और प्रभावित लोगों के विस्थापन के लिए फंड के लिए सरकार की ओर से 45 करोड़ रुपए की रकम जारी की गई है।
- CM ने गुरुवार को सेना, ITBP और NDRF के अधिकारियों के साथ अहम बैठकें कीं। वे भूस्खलन की जांच में लगे विभिन्न प्रतिष्ठानों के वैज्ञानिकों से भी मिलेंगे।
- गृह मंत्री अमित शाह ने जोशीमठ जमीन धंसने के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए मंत्रियों नितिन गडकरी, भूपेंद्र यादव, गजेंद्र शेखावत और उत्तर और दक्षिण ब्लॉक के अन्य अधिकारियों से मुलाकात की।
- सीएम धामी ने जोशीमठ में स्थानीय लोगों से मुलाकात की। उन्होंने, "हम जोशीमठ के लोगों के साथ खड़े हैं। प्रधानमंत्री खुद स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। मुझे उनका पूरा समर्थन है। उनके (प्रभावित लोगों) हितों का ध्यान रखा जाएगा।"
- मुख्यमंत्री की सचिव मीनाक्षी सुंदरम ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि बाजार दर के अनुसार, पर्याप्त मुआवजा दिया जाएगा।
- आक्रोशित स्थानीय लोग धरने पर बैठे रहे और अधिकारियों को होटलों को गिराने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। डूबते कस्बे में रहने के लिए असुरक्षित घरों पर जिला प्रशासन ने रेड क्रॉस के निशान लगा दिए हैं।
- उत्तराखंड के मुख्य सचिव एसएस संधू ने सोमवार को कहा था कि जिन जर्जर मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं, उन्हें जल्द ही गिरा दिया जाना चाहिए, ताकि उन्हें और नुकसान न हो।
- होटल मालिकों ने कहा कि उन्हें अखबार के जरिए राज्य सरकार के फैसले के बारे में पता चला और उन्होंने मुआवजे की राशि के एकमुश्त निपटान की मांग की। मलारी इन के मालिक ठाकुर सिंह विरोध में जहां होटल के सामने सड़क पर लेट गए, वहीं माउंट व्यू के मालिक लालमणि सेमवाल ने भी ऐसी ही भावनाएं व्यक्त कीं।