पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में 17 जून को सुबह एक मालगाड़ी ने कंचनजंघा एक्सप्रेस को पीछे से टक्कर मार दी थी। इस हादसे में तीन डिब्बे पटरी से उतर गए थे। वहीं 9 लोगों की मौत हो गई और 41 अन्य घायल हो गए। इस बीच यह भीषण रेल दुर्घटना कैसे, हुई। इस पर एक बड़ा खुलासा हुआ है। एक आंतरिक दस्तावेज के मुताबिक, मालगाड़ी के ड्राइवर की कोई गलती नहीं है। रेलवे के एक सूत्र ने बताया कि रानीपतरा के स्टेशन मास्टर ने मालगाड़ी के ड्राइवर को TA 912 नाम के एक दस्तावेज के जरिए लिखित मंजूरी दी गई थी। जिसमें उसे सभी लाल सिग्नल पार करने का अधिकार दिया गया था।
इस अधिकार पत्र में कहा गया कि ऑटोमेटिक सिग्नल खराब हो गए हैं। आधिकारिक दस्तावेज में ड्राइवर को कहा गया है कि आपको आरएनआई (रानीपतरा रेलवे स्टेशन) और सीएटी (चत्तर हाट जंक्शन) के बीच सभी ऑटोमेटिक सिग्नलों को पार करने के लिए अधिकृत किया जाता है।
जानिए TA 912 कब जारी किया जाता है
दरअसल, जब रेलवे में ट्रैक पर जब ऑटोमेटिक सिग्नल खराब हो जाते हैं तो ड्राइवर को TA 912 नाम का एक दस्तावेज जारी किया जाता है। जिसमें रेलवे के ड्राइवर को रास्ते में मिलने वाले सभी लाल सिग्नल को पार करने की मंजूरी मिली होती है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, रानीपतरा और चत्तर हाट जंक्शन के बीच सुबह 5.50 बजे से सभी ऑटोमेटिक सिग्नल खराब थे। दस्तावेजों में ये भी कहा गया है कि लिखित मंजूरी के साथ ही मृतक लोको पायलट को RNI और CAT के बीच सभी 9 सिग्नलों को तेज गति से पार करने की मंजूरी दी गई थी। सिग्नल लाल है या पीला उसे इस बात की कोई परवाह नहीं करना था। TA 912 जारी करने का मतलब ये है कि इस रूट पर कोई भी ट्रेन नहीं है।
सरकार ने किया मुआवजे का ऐलान
मुआवजे की घोषणा करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये दिए जाएंगे। गंभीर रूप से घायलों को 2.5-2.5 लाख रुपये और मामूली रूप से चोटिल लोगों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे। वैष्णव ने कहा कि रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है और कहा कि ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के उपाय किए जाएंगे।