केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को गुरुवार को शहर की एक अदालत से आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और चार डॉक्टरों पर पॉलीग्राफ टेस्ट करने की अनुमति मिल गई। ये चार ट्रेनी डॉक्टर वही हैं, जिनके साथ पीड़िता ने घटना वाली रात को कथित तौर पर खाना खाया था। CBI 9 अगस्त की घटना की जांच कर रही है, जिसमें अस्पताल परिसर में 31 साल की ट्रेनी डॉक्टर के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई।
Hindustan Times ने CBI के एक अधिकारी के हवाले से बतया, “CBI ने पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष और आरजी कर अस्पताल के चार डॉक्टरों पर पॉलीग्राफ टेस्ट करने की अनुमति मांगने के लिए सियालदह ACJM अदालत का रुख किया। गुरुवार को उन्हें कोर्ट ले जाया गया। अदालत ने अनुमति दे दी है।”
सुप्रीम कोर्ट ने दिया जरूरी आदेश जारी करने का निर्देश
यह तब हुआ है, जब सुप्रीम कोर्ट ने घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए गुरुवार को सियालदह अदालत को शुक्रवार शाम 5 बजे तक जरूरी आदेश पारित करने का निर्देश दिया था।
CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कहा, “पॉलीग्राफ टेस्ट करने का अनुरोध ACJM सियालदह के सामने पेश किया गया है। बताया गया है कि यह अंडर प्रोसेस है। ACJM सियालदह 23 अगस्त को शाम 5 बजे से पहले आवेदन पर आदेश पारित करेंगे।"
भले ही पॉलीग्राफ टेस्ट के नतीजे को "कन्फेशन" नहीं माना जाता है और अदालत में भी इसे स्वीकार नहीं किया जाता है। फिर भी टेस्ट केवल जांचकर्ताओं को उनकी जांच में मदद करने और संदिग्ध से सुराग हासिल करने के लिए किए जाते हैं।
FIR में देरी पर उठाए सवाल
शीर्ष अदालत ने FIR दर्ज करने में "14 घंटे की देरी" पर पश्चिम बंगाल सरकार से भी सवाल किया। संघीय एजेंसी ने पहले सियालदह अदालत से मामले के मुख्य आरोपी संजय रॉय पर पॉलीग्राफ टेस्ट करने की अनुमति मांगी थी।
कोलकाता पुलिस के एक सिविक वालंटियर रॉय को बलात्कार और हत्या के एक दिन बाद गिरफ्तार कर लिया गया और उसे CBI को सौंप दिया गया।