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लॉ कमीशन सेक्स के लिए सहमति देने की न्यूनतम उम्र घटाने के पक्ष में नहीं, जानिए क्या है पूरा मामला

लॉ कमीशन ने केंद्र सरकार को अपनी सलाह में कहा है कि पोक्सो एक्ट के तहत सहमति से सेक्स की न्यूनतम उम्र घटाकर 16 साल करने की जरूरत नहीं है। अभी सहमति से सेक्स के लिए न्यूनतम उम्र 18 साल है। उसने कहा है कि उम्र की सीमा घटाने से बाल विवाह और मानव तस्करी के खिलाफ चल रही लड़ाई पर खराब असर पड़ेगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 30, 2023 पर 4:58 PM
लॉ कमीशन सेक्स के लिए सहमति देने की न्यूनतम उम्र घटाने के पक्ष में नहीं, जानिए क्या है पूरा मामला
POCSO Act साल 2012 में लागू हुआ था। इसमें 18 साल से कम उम्र के बच्चों की सभी तरह की सेक्सुअल एक्टिविटीज को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब यह है कि अगर 18 साल से कम उम्र के दो बच्चे आपसी सहमति से यौन संबंध बनाते हैं तो भी उसे अपराध माना जाएगा।

लॉ कमीशन (Law Commission) सहमति से यौन संबंध बनाने के लिए न्यूनतम उम्र (Minimum age of consent for sex) घटाए जाने के पक्ष में नहीं है। उसने इस बारे में केंद्र सरकार को अपनी सलाह में कहा है कि पोक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत सहमति से सेक्स की न्यूनतम उम्र घटाकर 16 साल करने की जरूरत नहीं है। अभी सहमति से सेक्स के लिए न्यूनतम उम्र 18 साल है। उसने कहा है कि उम्र की सीमा घटाने से बाल विवाह और मानव तस्करी के खिलाफ चल रही लड़ाई पर खराब असर पड़ेगा। हालांकि, उसने पोक्सो एक्ट में कुछ संशोधन करने की सलाह दी है।

लॉ कमीशन ने पोक्सो एक्ट में संशोधन की सिफारिश की

लॉ कमीशन ने खासकर ऐसे मामलों को ध्यान में रख पोक्सो एक्ट में संशोधन की सिफारिश की है, जिनमें 18 साल से कम उम्र के बच्चे के बीच शारीरिक संबंध के लिए उनकी मौन स्वीकृति तो होती है, लेकिन इसके लिए कानूनी स्वीकृति नहीं होती है। उसने कहा है कि ऐसे मामलों में न्यायपूर्ण विवेक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उसका मानना है कि ऐसे मामलों में कोर्ट को सावधानी से काम लेने की जरूरत है, जिनमें यह पाता जाता है कि किशोर उम्र के प्यार को नियंत्रित नहीं किया जा सकता और आपराधिक मंशा मौजूद नहीं हो सकती है।

कोर्ट को गाइडेड ज्यूडिशियल डिस्क्रेशन का इस्तेमाल करना होगा

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