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जानिए, क्यों दिल्ली के 105 नगर निगम वार्डों में डेढ़ महीने तक बंद रहेंगे शराब के ठेके

राष्ट्रीय राजधानी के लगभग 80 वार्डों में शराब की दुकानें नहीं हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 22, 2021 पर 10:15 AM
जानिए, क्यों दिल्ली के 105 नगर निगम वार्डों में डेढ़ महीने तक बंद रहेंगे शराब के ठेके

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक अक्टूबर से शराब की दुकानों से इंग्लिश शराब और बीयर खरीदने वालों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, दिल्ली के कुल 272 नगरपालिका वार्डों में से 105 में डेढ़ महीने से अधिक समय तक कोई भी शराब की दुकान नहीं खुलेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, एक अक्टूबर से 16 नवंबर के बीच अरविंद केजरीवाल सरकार के आदेश के मुताबिक प्राइवेट शराब की दुकानें बंद रहेंगी ताकि नई आबकारी व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू किया जा सके।

राष्ट्रीय राजधानी के लगभग 80 वार्डों में शराब की दुकानें नहीं हैं। अधिकारियों के अनुसार अन्य 26 वार्डों में केवल प्राइवेट शराब की दुकानें हैं जो 1 अक्टूबर से बंद हो जाएंगी। पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक अक्टूबर से 16 नवंबर तक सिर्फ सरकारी शराब की दुकानें खुलेंगी।

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रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि व्यावहारिक रूप से, दिल्ली के तीन नगर निगमों के 105 वार्डों में 30 सितंबर से 16 नवंबर तक कोई भी शराब की दुकान नहीं मिलेंगी। इस दौरान 26 नगरपालिका वार्ड पूरी तरह से शराब मुक्त हो जाएंगे, जिनमें आरके पुरम, एंड्रयूज गंज, लाजपत नगर, पटपड़गंज, राजौरी गार्डन, तुगलकाबाद, कोटला मुबारकपुर, इंद्रपुरी, रानी बाग, रोहताश नगर, जिलमिल और पांडव नगर शामिल हैं।

साथ ही, 16 नवंबर के बाद सरकारी शराब के ठेके बंद हो जाएंगे। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार शराब बेचने का कारोबार नहीं करना चाहती है, और उसने पूरी तरह से इस बाजार से बाहर निकलने का फैसला किया है।

आबकारी विभाग ने इस महीने की शुरुआत में जारी एक आदेश में, दिल्ली सरकार द्वारा संचालित शराब की दुकानों को आवश्यक लाइसेंस शुल्क जमा करने के बाद 16 नवंबर तक शराब की खुदरा बिक्री जारी रखने की अनुमति दी थी।

आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की नई आबकारी नीति के तहत, 32 क्षेत्रों में सबसे अधिक बोली लगाने वालों को खुदरा शराब बिक्री लाइसेंस पहले ही आवंटित किए जा चुके हैं, जिनमें से प्रत्येक में लगभग 10 वार्ड और 27 शराब की दुकानें हैं। आबकारी विभाग द्वारा अगस्त और सितंबर में दो चरणों में संपन्न 32 क्षेत्रों के लिए बोली प्रक्रिया से सरकार को 8,900 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ।

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