Lucknow Rain: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार (31 जुलाई) को मूसलाधार बारिश ने नगर निगम के तैयारियों की पोल खोलकर रख दी। बारिश के बाद राजधानी पानी पानी हो गई। इतना ही नहीं मॉनसून सत्र के दौरान यूपी विधानसभा में भी पानी घुस गया। इसी पानी के बीच कर्मचारी और विधायक पैंट उठाकर विधानसभा के अंदर जाते नजर आए। विधानभवन रूट्स पर कई फीट पानी भर गया है। इसके अलावा नगर निगम के मुख्य कार्यालय में भी पानी घुस गया है। सूचना विमाग सहित सुन्नी वक्फ बोर्ड का दफ्तर भी बरसात की पानी में डूब गया है।
उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में खिड़कियों के रास्ते पानी घुस गया है। बेसमेंट में पानी जमा हुआ है। रिसेप्शन में भरे पानी को वाइपर से बाहर निकाला जा रहा है। विभाग में लगी तीनों लिफ्ट में पानी भर गया है, जिस वजह से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नगर निगम मुख्यलय लाल बाग में जब पानी घुसा तो चीफ इंजीनियर अपना जूता निकाल कर पानी से होते हुए बाहर निकले। नगर निगम पर ही लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने की जिम्मेदारी है, लेकिन अभी वह खुद अपने दफ्तर को ही स्मार्ट नहीं बना पाए हैं।
बता दें कि इस समय यूपी विधान परिषद और विधानसभा सत्र दोनों चल रहा है। सभी पार्टियों के विधायक विधानसभा के अंदर मौजूद हैं। राजधानी में लगातार हो रही बारिश से जगह-जगह जलजमाव हो गया है। मुख्य व्यवस्था अधिकारी विधानसभा के कमरे में भी पानी भर गया है।
विधानसभा परिसर में पानी भरने के कारण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सदन के गेट नंबर 1 से बाहर निकलना पड़ा। लखनऊ के नगर निगम की छत से पानी टपक रहे हैं। कर्मचारियों ने वीडियो बनाकर इसे सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है।
वायरल वीडियो के मुताबिक लखनऊ के हजरतगंज रेलवे स्टेशन के बाहर भी सड़कों पर बारिश का पानी भर गया है। गाड़ियों के आने जाने से पानी दुकानों और घरों तक पहुंच रहा है। राजधानी में बुधवार सुबह से ही तेज बारिश हो रही है।
केरल के पर्वतीय जिले वायनाड में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में मंगलवार 30 जुलाई को 150 से अधिक लोगों की जान चली गई। इसने हाल के वर्षों में आई इस तरह की कई अन्य विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं की यादें ताजा कर दी हैं।
जुलाई माह में, कर्नाटक और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में भूस्खलन की घटनाओं में कई लोगों की मौत हो गई। हालांकि, उनमें वायनाड की तरह व्यापक पैमाने पर तबाही नहीं हुई।