महाराष्ट्र (Maharashtra) के मराठवाड़ा (Marathwada) इलाके में इस साल भारी बारिश और बाढ़ के कारण अब तक करीब 46 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 6 लाख से अधिक किसानों के मालिकाना हक वाली करीब 3.80 लाख हेक्टेयर जमीन पर फसलें बर्बाद हुई हैं। बुधवार को महाराष्ट्र सरकार के रेवेन्यू डिपार्टमेंट की तरफ से कराए एक प्रारंभिक सर्वे के रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
मराठवाड़ा इलाके में महाराष्ट्र के औरंगाबाद, बीड़, हिंगोली, जालना, लातूर, नांदेड़, उस्मानाबाद और परभणि आदि जिले आते हैं। एक अधिकारी ने बताया कि रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने 1,73,717 हेक्टेयर भूमि का सर्वे पूरा कर लिया है, जो कुल बाढ़ प्रभावित इलाके का 45.85 प्रतिशत है।
औरंगाबाद के डिविजनल कमिश्नर ऑफिस की तरफ से जारी एक रिपोर्ट में बताया गया कि इस साल अब तक इस इलाके में 462.3 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि औसत बारिश 296.2 मिमी होती है। 26 जुलाई तक सामान्य से 156.08 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई थी।
रिपोर्ट मे कहा गया है, ''प्राथमिक सर्वे के मुताबिक मराठवाड़ा इलाके के 8 जिलों में अधिक बारिश और बाढ़ के कारण 3,78,866.19 हेक्टेयर भूमि के मालिक करीब 6.23 लाख किसान प्रभावित हुए हैं। सबसे अधिक प्रभावित जिला नांदेड़ है, जहां 2,98,861.19 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है।''
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस इलाके में बारिश से संबंधित घटनाओं में कुल 660 पशु मारे गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मॉनसून में अधिक बारिश से मराठवाड़ा के 182 सर्कल प्रभावित हुए हैं। बारिश से जुड़ी घटनाओं में अब तक 46 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 25 की मौत बिजली गिरने से, 20 की डूबने से और एक की दीवार गिरने से हुई है।