Maiden Pharmaceuticals के कामकाज में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं। जांच में पाया गया है कि यह दवा कंपनी नियमों का पालन नहीं करती थी। हरियाणा सरकार के ड्रग कंट्रोलर ने कंपनी के सोनीपत स्थिति मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में कई तरह की लापरवाहियों के गंभीर आरोप लगाया है।
ड्रग कंट्रोलर ने पांच पेज की रिपोर्ट में इस बारे में बताया है। मनींकंट्रोल ने इस रिपोर्ट को देखा है। इसमें हरियाणा सरकार के ड्रग ऑफिशियल्स ने 12 नियमों के उल्लंघन के बारे में बताया है। इस बारे में ड्रग कंट्रोलर ने Maiden Pharma को 7 अक्टूबर को कारण बताओ नोटिस भेजा था।
ड्रग कंट्रोलर ने नोटिस में कहा है कि कंपनी ने कफ सिरप बनाने में इस्तेमाल होने वाले रॉ मैटेरियल की क्वालिटी की जांच नहीं करती थी। आरोप है कि कंपनी के सीरफ के इस्तेमाल से गांबिया में पांच दर्जन से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई थी। इस कफ सिरप को संक्रमित पाया गया था। उसके बाद से कंपनी के खिलाफ कई तरह की जांच चल रही है।
कंपनी अपने कफ सिरप का निर्यात गांबिया सहित कई देशों को करती थी। इसके कुल चार तरह के कफ सिरप को गांबिया में 66 बच्चों की मौत का जिम्मेदार माना जा रहा है। इनमें Promethazine Oral Solution, Kofexmalin Baby Cough Syrup, Makoff Baby Cough Syrup और Magrip N Cold Syrup शामिल हैं।
हरियाणा के FDA ने कंपनी को शो कॉज नोटिस का जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया है। उसने कंपनी से पूछा है कि उसका मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस क्यों नहीं कैंसिल होना चाहिए? हरियाणा के स्टेट ड्रग्स कंट्रोलर कम लाइसेंसिंग अथॉरिटी यानी FDA के मनमोनह तनेजा की तरफ से भेज नोटिस में कहा गया है कि कंपनी का जवाब 7 दिन के अंदर मिल जाना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 एंड रूल्स, 1945 के तहत कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
FDA के अधिकारियों ने अक्टूबर के पहले हफ्ते में दो बार Maiden Pharma के प्लांट की जांच की। इसके बाद ड्रग रूल्स, 1945 के रूल 85(2) के तहत शो-कॉज नोटिस जारी किया गया। जांच टीम ने पाया कि पूरे प्लांट में रिनोवेशन का काम चल रहा था। कारण बताओ नोटिस में यह भी कहा गया है कि कंपनी कफ सिरप की मैन्युफैक्चरिंग और टेस्टिंग में इस्तेमाल होने वाले इंस्ट्रूमेंट्स और इक्विपमेंट की लॉग-बुक पेश नहीं कर सकी।