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मिलिए तेजस्वी को लालू की छाया से बाहर निकालने वाले 'बड़े भाई' और सलाहकार संजय यादव से...

विधानसभा चुनाव में संजय यादव ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से छोटी-छोटी चीजों पर ध्यान केंद्रित करते हुए RJD की चुनावी रणनीति बनाई

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 12, 2020 पर 7:45 AM
मिलिए तेजस्वी को लालू की छाया से बाहर निकालने वाले 'बड़े भाई' और सलाहकार संजय यादव से...

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2020) में NDA और महागठबंधन में जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। RJD के नेतृत्व वाला महागठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया है। महागठबंधन के इस प्रदर्शन का श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) को दिया जा रहा है। इस चुनाव में तेजस्वी यादव को कई चुनावी रणनीतिकारों का साथ मिला है। खासकर, उनके राजनीतिक सलाहकार संजय यादव (Sanjay Yadav) को बड़ा श्रेय दिया जा रहा है। मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले संजय यादव को तेजस्वी का दाहिना हाथ भी माना जाता है। आइए जानते हैं संजय यादव और तेजस्वी की मुलाकात से अबतक की पूरी कहानी...

2013 में शुरू हुआ सफर

अक्टूबर 2013 में जब 23 साल तेजस्वी यादव ने महसूस किया कि क्रिकेट में उनका करियर खत्म होने वाला है, तो उन्होंने राजनीति में दूसरी पारी की शुरुआत करने का फैसला लिया। इसमें संजय यादव ने तेजस्वी पर भरपूर विश्वास जताया। तब तेजस्वी ने संजय से हाथ मिलाया था, जो उनसे सिर्फ 5 साल बड़े थे और पिता समान भी थे। उस दौरान तेजस्वी ने संजय यादव का परिचय देते हुए कहा था कि ये मेरे बडे भाई हैं, अब हम साथ साथ हैं। देखते ही देखते 36 वर्षीय संजय यादव जल्द ही लालू परिवार के अंदरूनी सूत्र बन गए।

हरियाणा के रहने वाले हैं संजय

अपने तेज दिमाग और राजनीतिक सूझबूझ के जरिए संजय यादव ने लालू यादव का विश्वास बहुत कम समय में हासिल कर लिया। पिछली बार जब संजय RJD संरक्षक लालू प्रसाद यादव से रांची जेल में मिले थे, तो गठबंधन के तौर तरीकों और उम्मीदवार चयन पर खूब चर्चा की थी। एक सूबेदार पिता का इकलौते बेटे संजय यादव मामूली परिवार से आते हैं। उन्होंने हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नांगल सिरोही (Nangal Sirohi in Mahendragarh) में गांव के एक हिंदी-माध्यम स्कूल में पढ़ाई की। माना जाता है कि संजय यादव तेजस्वी यादव के लिए सबसे भरोसेमंद हैं।

IT नौकरी छोड़ RJD का थामा दामन

तेजस्वी से मुलाकात के बाद नौकरी छोड़कर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ज्वाइन की थी। MBA ग्रेजुएट संजय यादव ने 2013 तक गुरुग्राम में एक IT फर्म में टीम मैनेजर के तौर पर काम किया। RJD से जुड़ने के बाद इन्होंने ही सूचना प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया की दुनिया में पार्टी का परिचय कराया। RJD के संगठन में EBC और एससी/एसटी के लिए आरक्षण लागू करने पर जोर दिया। इसके बाद RJD संगठनात्मक पदों में आरक्षण लागू करने वाली देश की पहली राजनीतिक पार्टी बनी।

News18 से बातचीत में संजय ने कहा था कि मेरी उम्र से अधिक चुनाव लड़ने वाले दिग्गज नेता (लालू प्रसाद यादव) को समझाना बहुत मुश्किल है। इसके लिए आपको ठोस तैयारी करनी पड़ती है। अगर आप सामाजिक संयोजनों पर उचित डेटा नहीं रखते हैं, तो क्या समझाइएगा। हालांकि, लालूजी समझदार हैं। उन्होंने हमसे (तेजस्वी और मुझे) कहा कि अब तुम लोग जानो, लेकिन जीत जाएंगे ना? संजय यादव ने एक लाइन में कहा था, निश्चिंत रहिए। उन्होंने बताया कि RJD और बिहार में एक बाहरी व्यक्ति होने के नाते मेरा जुड़ाव केवल नेता से है। कोई आत्मीयता, कोई पक्षपात नहीं है।

तेजस्वी के हर फैसले में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

तेजस्वी यादव की महागठबंधन में मौजूदा स्थिति, पिछले कुछ सालों में सभी प्रमुख मुद्दों पर पार्टी का रुख तय करने और डिजिटल प्लेटफार्मों पर एक मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित करने के पीछे संजय यादव ही हैं। वह फिलहाल तेजस्वी के राजनीतिक सलाहकार के रूप में सेवारत हैं। डिप्टी सीएम के रूप में उनके 18 महीने के सफल कार्यकाल के दौरान संजय यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जनता से माफी मांगने और पोस्टर पर अपने मुख्यमंत्री माता-पिता की छवियों के बिना जाने का सुविचारित फैसला तेजस्वी यादव का था, लेकिन इसके बीज संजय ने बोए थे।

खुद को कार्यालय तक किया सीमित

इस बार विधानसभा चुनाव में संजय यादव ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से छोटी-छोटी चीजों पर ध्यान केंद्रित करते हुए RJD की चुनावी रणनीति बनाई। कोरोना काल में जब विपक्ष RJD पर निशाना साध रहा था, उस समय संजय यादव तेजस्वी के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार कर रहे थे। ऐसे में महागठबंधन बिहार चुनाव में जो सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, तो निश्चित तौर पर संजय यादव की रणनीतियों को भी इसका श्रेय जाएगा।

तेजस्वी के हर इलाके में जनसभा करने की योजना और पैदल घूमने की रणनीति भी संजय यादव ने बनाई थी। उन्होंने एक ही दिन में 19 रैलियों का रिकॉर्ड बनाया। औसतन प्रति दिन 12.5 रैलियों को संबोधित किया। ये सब संजय द्वारा ही सुनिश्चित किया गया था। हालांकि, पूरे चुनाव प्रचार में उन्होंने खुद को कार्यालय तक सीमित रखा। कहीं भी तेजस्वी के साथ नहीं दिखे, लेकिन इस दौरान रिसर्च वर्क, वोटिंग ट्रेंड्स पर नजर बनाए रखी।

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