Mumbai Boat Accident: मुंबई बोट हादसे में एक व्यक्ति और बच्चा अब भी लापता, तलाश जारी

Mumbai Boat Accident: नौसेना की एक स्पीडबोट के नियंत्रण खोने और मुंबई तट के पास एक निजी नौका से टकरा जाने के कारण 13 लोगों की मौत के एक दिन बाद गुरुवार (19 दिसंबर) को भी तलाशी अभियान जारी रहा। अधिकारियों के मुताबिक, दो यात्री जिनमें एक पुरुष और एक बच्चा शामिल है वह अभी भी लापता बताए जा रहे हैं

अपडेटेड Dec 19, 2024 पर 3:10 PM
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Mumbai Boat Accident: बुधवार को नौका पर सवार 113 लोगों में से 13 लोगों की जान चली गई थी

Mumbai Boat Accident: मुंबई तट के पास नौसेना पोत के पर्यटक नौका को टक्कर मारने की घटना के एक दिन बाद भी दो यात्रियों का कुछ पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने बताया कि इस हादसे में पोत और पर्यटक नौका पर सवार 113 लोगों में से 13 लोगों की जान चली गई थी। जबकि 98 लोगों को बचा लिया गया था। एक अधिकारी ने बताया कि लापता दो लोगों की पहचान 43 वर्षीय हंसराज भाटी और 7 वर्षीय जोहान मोहम्मद निसार अहमद पठान के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि नौसेना और तटरक्षक बल की मदद से तलाश अभियान जारी है।

नौसेना ने बताया कि बुधवार शाम करीब चार बजे मुंबई तट पर करंजा के पास इंजन परीक्षण के दौरान नौसेना के एक पोत ने नियंत्रण खो दिया। वह 'नीलकमल' नामक नौका से जा टकराया। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई। 98 लोगों को बचा लिया गया। यह नौका यात्रियों को गेटवे ऑफ इंडिया से लोकप्रिय पर्यटन स्थल 'एलीफेंटा' द्वीप पर लेकर जा रही थी।

नौसेना की ओर से जारी किए गए एक बयान में कहा गया कि नौसेना का पोत इंजन टेस्ट के लिए जा रहा था, लेकिन तभी शाम चार बजे इसने नियंत्रण खो दिया और करंजा के पास यह नीलकमल नामक नौका से टकरा गया।


नौसेना ने कहा, "नौसेना ने तटरक्षक बल और समुद्री पुलिस के समन्वय से खोज एवं बचाव प्रयास तुरंत शुरू किए। बचाव अभियान में नौसेना के चार हेलीकॉप्टर, नौसेना की 11 नौकाएं, तटरक्षक बल की एक नौका और समुद्री पुलिस की तीन नौकाओं की मदद ली गई।"

बयान में आगे कहा गया, "नौसेना और अन्य जहाजों की मदद से जीवित बचे लोगों को आसपास की जेटी पर पहुंचाया गया और फिर उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया। अब तक 99 लोगों को बचाया जा चुका है।" मुंबई पुलिस के अनुसार, मृतकों में सात पुरुष, चार महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं।

'ऐसी भयावह घटना कभी नहीं देखी'

मुंबई तट पर हुए नौका हादसे के बाद लोगों की मदद के लिए पहुंचे कुछ नौकाओं के चालक घटनास्थल के हालात देखकर स्तब्ध रह गए, जहां लोग मदद के लिए गुहार लगा रहे थे। चालकों ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी भयावह घटना कभी नहीं देखी। मुंबई पोर्ट ट्रस्ट (एमबीपीटी) की पायलट नौका 'पूर्वा' के चालक आरिफ बामणे ने कहा, "जब हम वहां पहुंचे तो हालात बेहद भयावह थे। लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे और कुछ लोग तो रो रहे थे।"

उन्होंने बताया कि फेफड़ों में पानी भर जाने से एक छोटी बच्ची बेसुध अवस्था में पड़ी थी। चालक और अन्य बचावकर्मियों ने उसके पेट व छाती पर दबाव डालकर पानी निकालने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि धीरे-धीरे उसकी सांसें सामान्य हो गईं। चालक ने बताया कि मछली पकड़ने के लिए उपयोग में आने वाली नौका और एक अन्य पर्यटक नौका उनसे पहले ही घटनास्थल पर पहुंच गई थी।

नौका चालक के रूप में 18 वर्षों का अनुभव रखने वाले बामणे ने बताया कि उन्होंने पहले भी घटनाएं देखी हैं। लेकिन बुधवार की घटना सबसे भयावह और दुखद थी। छोटी पर्यटक नौका के चालक इकबाल गोठेकर ने पीटीआई को बताया कि उनकी नौका के द्वीप से तीन बजकर 35 मिनट पर रवाना होने के 25 से 30 मिनट बाद उन्हें घटना के बारे में जानकारी हुई और वह दुर्घटना स्थल पर सबसे पहले पहुंचने वालों में से एक थे।

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मूलरूप से रायगढ़ जिले के निवासी गोठेकर ने बताया कि हादसे का शिकार हुई नौका के यात्री मदद के लिए हाथ हिला रहे थे। उन्होंने बताया कि जब वे घटनास्थल पर पहुंचे तो मछुआरों की एक नौका भी वहां आ गई। गोठेकर ने बताया कि उन्होंने 16 लोगों को बचाया और उन्हें गेटवे ऑफ इंडिया तक सुरक्षित पहुंचाया। बचाए गए लोगों को पुलिस चौकी ले जाया गया। सूत्रों के अनुसार, नौका की क्षमता 80 यात्रियों की थी और यह घटना से लगभग 45 मिनट पहले यह गेटवे ऑफ इंडिया से एलीफेंटा द्वीप के लिए रवाना हुई थी। हादसा जवाहर द्वीप के पास हुआ।

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