गुजरात के एक गांव में हैं नए FBI डायरेक्टर काश पटेल की जड़ें, भगवद गीता पर हाथ रखकर ली शपथ

काश पटेल FBI का नेतृत्व करने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी बन गए हैं। पटेल के सभी करीबी रिश्तेदार विदेश में बसे हुए हैं। काश पटेल का नाम पाटीदार समुदाय की वंशावली में जोड़ा जाना अभी बाकी है, लेकिन उनके परिवार की 18 पीढ़ियों का रिकॉर्ड वंशावली में है

अपडेटेड Feb 22, 2025 पर 11:03 AM
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न्यूयॉर्क में जन्मे काश पटेल पाटीदार समुदाय से हैं।

अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी काश पटेल (Kash Patel) को फेडरल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (FBI) का नया डायरेक्टर बनाया गया है। अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने उन्हें शपथ दिलाई। शुक्रवार को आइजनहावर एग्जीक्यूटिव ऑफिस बिल्डिंग में इंडियन ट्रीटी रूम में पटेल ने भगवद गीता पर हाथ रखकर शपथ ली। काश पटेल गुजरात के आणंद जिले के भद्रन गांव से ताल्लुक रखते हैं, जहां से उनका परिवार 7-8 दशक पहले युगांडा चला गया था।

न्यूयॉर्क में जन्मे पटेल पाटीदार समुदाय से हैं। वह FBI का नेतृत्व करने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी बन गए हैं। पटेल के सभी करीबी रिश्तेदार विदेश में बसे हुए हैं। अफ्रीका जाने के बाद उन्होंने भद्रन में अपने पैतृक मकान बेच दिए। आणंद स्थित समुदाय का संगठन छ गाम पाटीदार मंडल अपने सदस्यों की वंशावली रखता है। छ गाम पाटीदार मंडल, आणंद जिले के 6 गांवों/कस्बों- धर्मज, नडियाद, सोजित्रा, भद्रन, वासो और करमसद के पाटीदार समुदाय का एक संगठन है। देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल करमसद से थे।

वंशावली में काश पटेल का नाम जोड़ा जाना बाकी


न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, संगठन के सचिव और बीजेपी की आणंद जिला इकाई के अध्यक्ष राजेश पटेल ने कहा, ‘‘वंशावली में काश पटेल के पिता प्रमोद पटेल और उनके भाइयों और दादा के नाम भी हैं।’’ हालांकि काश पटेल का नाम वंशावली में जोड़ा जाना अभी बाकी है, लेकिन उनके परिवार की 18 पीढ़ियों का रिकॉर्ड इसमें है। राजेश पटेल ने बताया, ‘‘हमारे रिकॉर्ड के अनुसार, परिवार भद्रन गांव के मोती खड़की इलाके में रहता था और वे लगभग 70 से 80 साल पहले युगांडा चले गए थे। परिवार ने अपना पैतृक मकान और जमीन बेच दी है और उनके सभी रिश्तेदार विदेशों में, खासकर अमेरिका में बस गए हैं। जब काश के परिवार का कोई सदस्य भारत आएगा तो हम वंशावली में उसके नाम सहित अगली पीढ़ी के नाम दर्ज करने की इजाजत मांगेंगे।’’

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युगांडा से निकाले जाने के बाद कुछ वक्त तक भारत में था परिवार

उन्होंने कहा, ‘‘हम काश पटेल से नहीं मिले हैं क्योंकि परिवार ने हाल के वर्षों में आणंद का दौरा नहीं किया है। लेकिन हमारे समुदाय के कई लोग उन्हें जानते हैं।’’ राजेश पटेल ने कहा कि जहां तक ​​उन्हें पता है, 1970 में अफ्रीकी देश से निष्कासन के बाद परिवार कुछ समय के लिए भारत लौटा था। उन्होंने कहा, ‘‘युगांडा से निष्कासित किए गए ये भारतीय कुछ समय के लिए भारत आए थे, क्योंकि उन्होंने ब्रिटेन, अमेरिका या कनाडा में शरण के लिए आवेदन किया था। काश पटेल का परिवार भी कुछ समय के लिए यहां आया था और फिर उनके आवेदन स्वीकार होने के बाद वे कनाडा चले गए।’’ राजेश पटेल ने बताया कि कनाडा से वे अमेरिका चले गए, जहां 1980 में काश पटेल का जन्म हुआ।

युगांडा में रहने वाले भारतीयों को तानाशाह ईदी अमीन ने निकाल दिया था। अमीन ने 1971 में सैन्य तख्तापलट में सत्ता हथिया ली थी। 1972 में अमीन ने भारतीय समुदाय को 90 दिनों में देश छोड़ने का आदेश दिया।

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