Odisha Train Accident: दो दशकों में भारत के सबसे भीषण रेल हादसे (Train Accident) में कम से कम 261 लोगों की मौत हो गई है, लेकिन अभी भी ये साफ नहीं है कि ये दुर्घटना तकनीकी गड़बड़ी या इंसानी गलती के कारण हुई थी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव शनिवार को स्थिति का जायजा लेने के लिए ओडिशा के बालासोर (Balasore) में दुर्घटना स्थल पर पहुंचे और दुर्घटना की हाई लेवल जांच कराने का आश्वासन दिया।
वैष्णव ने कहा, "एक उच्च स्तरीय जांच की जाएगी और रेल सेफ्टी कमिश्नर भी एक स्वतंत्र जांच करेंगे।" उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान बचाव और राहत कार्यों पर है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी घटनास्थल का जायजा लेने के लिए ओडिशा पहुंच रहे हैं।
Odisha Train Accident: क्या बताती हैं शुरुआती रिपोर्ट?
Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे के सिग्नलिंग कंट्रोल रूम से आई शुरुआती रिपोर्टों की मानें, तो दुर्घटना मानव त्रुटि का नतीजा हो सकती है, क्योंकि दुर्घटना से कुछ मिनट पहले ट्रेन ने गलत ट्रैक ले लिया था।
रिपोर्ट में रेलवे के खड़गपुर डिवीजन के सिग्नलिंग कंट्रोल रूम से आए एक वीडियो के हवाले से बताया गया कि रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, चेन्नई जाने वाली कोरोमंडल एक्सप्रेस (Coromandel Express) ने मेन लाइन के बजाय बहनागा बाजार स्टेशन के पास एक लूप लाइन ले ली, जिस पर एक मालगाड़ी खड़ी थी। वीडियो में दो मेन लाइनों और दो लूप लाइनों सहित चार रेलवे ट्रैक दिखाए गए हैं।
लूप लाइन स्टेशन एरिया में बनाई जातीं हैं, जो ट्रेनों की आवाजाही को आसान बनाने में मदद करती हैं, ताकि ज्यादा ट्रेन आ सकें। बहनागा बाजार स्टेशन (Bahanaga Bazar Station) एरिया में भी इसी तरह की लूप लाइनें बनाई गई थीं।
आमतौर पर लूप लाइनें 750 मीटर लंबी होती हैं, ताकि एक पूरी मालगाड़ी उस पर आकर खड़ी हो सके। हालांकि, भारतीय रेलवे लंबी लूप लाइनें बनाने को बढ़ावा देता है।
रेल मंत्री के एक अधिकारी ने बताया कि करीब 127 Km प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही कोरोमंडल एक्सप्रेस मालगाड़ी से टकरा गई और मेन लाइन पर पटरी से उतर गई। कुछ ही मिनटों के भीतर दूसरी दिशा से आ रही हावड़ा जाने वाली यशवंतनगर एक्सप्रेस (Yashwantnagar Express), पटरी से उतरी कोरोमंडल एक्सप्रेस से टकरा गई।
रिपोर्ट में नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, "ये कैसे हुआ और क्यों हुआ? ये तो गहन जांच के बाद ही पता चलेगा कि रेलवे बोर्ड ने क्या आदेश दिया था, लेकिन शुरुआती नजर में ये मानवीय भूल लग रही है।"
ईस्ट कोस्ट रेलवे जोन के एक रिटायर रेलवे अधिकारी ने, हालांकि, संकेत दिया कि दुर्घटना तकनीकी खराबी और सिग्नल इश्यू के कारण हुई होगी।
पूर्व अधिकारी ने कहा, “हालांकि, स्टेशन प्रबंधक के कार्यालय में रखे सिग्नल पैनल के अनुसार, मालगाड़ी रेलवे स्टेशन की लूप लाइन पर थी, लेकिन जब कोरोमंडल एक्सप्रेस 127 Km प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती हुई आई, तो इसकी आखिरी कुछ बोगियां अभी भी मुख्य लाइन पर मौजूद हो सकती हैं।" खास बात यह है कि पूरी जांच के बाद ही हादसे के कारणों का पता चल पाएगा।