संसद सुरक्षा: कई लेयर की सिक्योरिटी, गैलरी से झुकने तक की मनाही, फिर कैसे हो गई इतनी बड़ी चूक, सुरक्षा उल्लंघन पर उठते सवाल

संसद परिसर को सुरक्षा (Parliament Security) की कई लेयर से मजबूत किया गया है। संसद सुरक्षा सेवा (Parliament Security Service) भारत की सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक संस्था की सुरक्षा के लिए CRPF, ITBP, दिल्ली पुलिस, विशेष सुरक्षा समूह (SPG), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के साथ सहयोग करती है। संसद में विजिटर्स की एंट्री किसी सदस्य या उच्च-स्तरीय अधिकारी की तरफ से आवेदन जमा करने के बाद ही होती है

अपडेटेड Dec 14, 2023 पर 8:04 PM
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संसद सुरक्षा: कई लेयर की सिक्योरिटी, गैलरी से झुकने तक की मनाही, फिर कैसे हो गई इतनी बड़ी चूक, सुरक्षा उल्लंघन पर उठते सवाल

लोकसभा (Lok Sabha) में गंभीर सुरक्षा चूक (Security Breach) वाले नाटकीय वीडियो फुटेज देख बुधवार को पूरा देश स्तब्ध रह गया। उस वक्त ये किसी आतंकी हमले (Terrorist Attack) की साजिश जैसा लग रहा था, क्योंकि ये घटना 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले (Parliament Attack) की 21वीं बरसी के दिन हुई थी। पिछली चूक में पांच आतंकवादी संसद भवन परिसर में घुसने में कामयाब हो गए थे, जिसके बाद हमले में आठ सुरक्षाकर्मियों और एक माली की मौत हो गई थी।

गनीमत ये है कि इसबार की घटना का किसी आतंकी साजिश से कोई कनेक्शन नहीं निकला। दो युवा संसद के अंदर और एक युवक और महिला बाहर नारे लगाकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते दिखे।

सदन के अंदर एक प्रदर्शनकारी को पब्लिक गैलरी से लटकते हुए और अपने जूते के अंदर छिपे कनस्तर से कुछ पीली गैस छिड़कते हुए देखा गया, जबकि दूसरे को बेंचों पर छलांग लगाते देखा गया। बाद में, ये साफ हुआ कि ये कोई खतरनाक गैस नहीं थी।


संसद परिसर को सुरक्षा की कई लेयर से मजबूत किया गया है। संसद सुरक्षा सेवा (Parliament Security Service) भारत की सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक संस्था की सुरक्षा के लिए CRPF, ITBP, दिल्ली पुलिस, विशेष सुरक्षा समूह (SPG), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के साथ सहयोग करती है।

संसद में विजिटर्स की एंट्री किसी सदस्य या उच्च-स्तरीय अधिकारी की तरफ से आवेदन जमा करने के बाद ही होती है। विजिटर्स को दिल्ली पुलिस, CRPF और संसद सुरक्षा सेवा के तंत्र के साथ-साथ मेटल डिटेक्टर गेट और आधुनिक सेंसर से लैस फ्रिस्किंग मशीनों समेत सुरक्षा की लेयर से गुजरना होता है।

इसके अलावा, विजिटर्स को सदन के भीतर कोई भी वस्तु ले जाने और अपने निर्धारित बैठने के जगह या पब्लिक गैलरी के बजाए किसी दूसरी जगह जाने की अनुमति भी नहीं होती।

जुलाई 2023 में लोकसभा की तरफ से जारी बुलेटिन के अनुसार, भारत की संसद ने अलग-अलग गेट पर डोर-फ्रेम मेटल डिटेक्टर लगाए हैं।

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बुलेटिन में कहा गया है, “संसद सदस्यों और पूर्व संसद सदस्यों के साथ आने वाले विजिटर्स को डोर-फ्रेम मेटल डिटेक्टर से गुजरना जरूरी है और फिजिकल चेकिंग से गुजरना पड़ सकता है। सुरक्षा कर्मचारियों की तरफ से उनके सामान की स्कैनिंग/तलाशी भी ली जा सकती है।"

इसमें आगे कहा गया है, “संसद भवन और सेंट्रल हॉल में प्रवेश माननीय अध्यक्ष की तरफ से जारी नियमों और निर्देशों के अनुसार नियंत्रित किया जाता है। वैध पास के बिना किसी भी व्यक्ति को, भले ही वह संसद सदस्यों के साथ ही क्यों न हो, एंट्री की अनुमति नहीं है।”

विजिटर्स/गेस्ट के लिए गैलरी पास सांसदों की तरफ से जमा किए गए आवेदनों के आधार पर सीमित कोटा में जारी किए जाते हैं, चाहे वे कागजी हों या ऑनलाइन।

राज्यसभा की तरफ से दिसंबर 2020 में 'संसदीय सुरक्षा सेवा - एक अवलोकन' टाइटल से जारी एक नोट के अनुसार, सदन के अंदर एडवांस सुरक्षा उपायों में विजिटर्स पर अलग-अलग प्रतिबंध शामिल हैं, जैसे एक्सेस पास जारी करने से पहले उनके बैकग्राउंड की पुष्टि करना। 2001 के हमले के बाद, संसद भवन परिसर में सुरक्षा मामलों पर संयुक्त संसदीय समिति की सिफारिशों के आधार पर सुरक्षा में काफी बढ़ोतरी की गई थी।

संसद के विजिटर्स से जुड़े सुरक्षा उपायों पर एक नजर:

  • - "किसी भी व्यक्ति को वैध कार्ड या पास के बिना संसद भवन या गैलरी के परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।"
  • - “विजिटर्स को गैलरी में बैठकर तस्वीरें लेने या रेखाचित्र और नोट्स बनाने की अनुमति नहीं है। हालांकि, प्रेस संवाददाताओं को केवल प्रेस गैलरी से नोट्स लेने की अनुमति है।"
  • - "विजिटर लाठी, छाते, ब्रीफकेस, हैंडबैग, धूम्रपान सामग्री, किताबें, प्रिंटिड पोस्टर, या ऐसी कोई भी सामग्री गैलरी में नहीं ला सकते।"
  • - "सिखों को छोड़कर, जो अधिकतम 9 cm (6 सेमी ब्लेड सहित) की कृपाण ले जा सकते हैं, किसी भी विजिटर को गैलरी में हथियार ले जाने की अनुमति नहीं है।"
  • - "सेलुलर फोन, पेजर आदि को विजिटर्स के लिए संसद भवन परिसर के अंदर ले जाने की अनुमति नहीं है।"
  • - "आगंतुकों या प्रेस संवाददाताओं को सदन की गैलरी या सेंट्रल हॉल में रेलिंग पर झुकने की अनुमति नहीं है।"
  • - “विजिटर्स को एक गैलरी से दूसरी गैलरी में जाने की मनाही है।”

संसद की सुरक्षा चूक पर उठते सवाल

बुधवार को हुए गंभीर सुरक्षा उल्लंघन के बाद कई बड़े सवाल खड़े होते हैं। ये लोग भारतीय संसद में लगी सिक्योरिटी लेयर को कैसे तोड़ पाए, जिसमें एंट्री प्वाइंट और रूट पर डोर-फ्रेम मेटल डिटेक्टर शामिल हैं? क्या उनकी तलाशी नहीं ली गई? क्या तलाशी ठीक से नहीं की गई? क्या विजिटर्स पास देने से पहले ठीक से जांच नहीं की गई थी?

2010 के नोट में साफ़ लिखा है कि रेलिंग से झुकना मना है, फिर भी एक व्यक्ति को झूलते हुए और दूसरे को कूदते हुए देखा गया। ये कैसे हो गया?

सार्वजनिक गैलरी में सिक्योंरिटी विंग की क्या भूमिका थी? क्या होता अगर ये किसी तरह की कोई हानिकारण या जहरीली गैस होती? क्या सुरक्षाकर्मियों की सही से ट्रेनिंग नहीं हुई थी? ये सुरक्षा उल्लंघन गंभीर खामियों को उजागर करता है. जिसके लिए एक अचूक तंत्र सुनिश्चित करने के लिए तत्काल जांच की जरूरत है।

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