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PMLA: मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दायरे में अब जज, सैन्य अधिकारी और NGO भी, केंद्र सरकार ने कानून में किया बड़ा बदलाव

वित्त मंत्रालय के अनुसार, PMLA के संशोधित नियमों के तहत, जिस व्यक्ति को किसी दूसरे देश की तरफ से प्रमुख सार्वजनिक कार्य सौंपे गए हैं, जिनमें राज्यों या सरकारों के प्रमुख, वरिष्ठ राजनेता, वरिष्ठ सरकार या न्यायिक या सैन्य अधिकारी, राज्य के स्वामित्व वाले निगमों के वरिष्ठ अधिकारी और महत्वपूर्ण राजनीतिक दल के पदाधिकारी शामिल हैं, वे PEP कहे जाएंगे

Curated By: Shubham Sharmaअपडेटेड Mar 10, 2023 पर 9:30 PM
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सरकार ने धनशोधन निवारक कानून (PMLA) में संशोधन किया है। इसके तहत बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए राजनीतिक पृष्ठभूमि (PEP) के लोगों के वित्तीय लेनदेन का ब्योरा रखना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही, PMLA के प्रावधानों के तहत वित्तीय संस्थानों या दूसरी संबद्ध एजेंसियों को गैर-लाभकारी संगठनों या NGO के वित्तीय लेनदेन के बारे में सूचना जुटाना भी अनिवार्य कर दिया गया है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, PMLA के संशोधित नियमों के तहत, “जिस व्यक्ति को किसी दूसरे देश की तरफ से प्रमुख सार्वजनिक कार्य सौंपे गए हैं, जिनमें राज्यों या सरकारों के प्रमुख, वरिष्ठ राजनेता, वरिष्ठ सरकार या न्यायिक या सैन्य अधिकारी, राज्य के स्वामित्व वाले निगमों के वरिष्ठ अधिकारी और महत्वपूर्ण राजनीतिक दल के पदाधिकारी शामिल हैं, वे PEP कहे जाएंगे।”

वित्तीय संस्थानों को अपने NGO ग्राहकों की जानकारी का ब्यौरा भी नीति आयोग (NITI Aayog) के दर्पण पोर्टल पर रखना होगा और ग्राहक व संबद्ध इकाई के बीच व्यापारिक संबंध खत्म होने या खाता बंद होने (जो भी बाद में हो) के पांच साल बाद तक ब्यौरा संभाल कर रखना होगा।

इस संशोधन के बाद, बैंकों और वित्तीय संस्धानों को अब न सिर्फ PEP और NGO के वित्तीय लेनदेनों का रिकॉर्ड संभालकर रखना होगा बल्कि मांगे जाने पर उसे प्रवर्तन निदेशालय (ED) से शेयर भी करना होगा।

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