Lakhimpur Kheri violence case: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकोनिया गांव में पिछले साल तीन अक्टूबर को हुए हिंसा मामले में मुख्य आरोपी और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ट्रेनी (Ajay Mishra Teni) के बेटे आशीष मिश्रा (Ashish Mishra) उर्फ मोनू को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ द्वारा जमानत दिए जाने के लगभग एक सप्ताह बाद मंगलवार को जेल से रिहा कर दिया गया।
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 10 फरवरी को मिश्रा को लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में जमानत दी थी। अदालत की लखनऊ पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए सुनवाई पूरी करने के बाद मिश्रा की याचिका पर 18 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
जेल के मेन गेट पर मीडिया का जमावड़ा रहा, लेकिन मोनू को जेल के पिछले गेट से बाहर निकाला गया। इसके पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया। इस दौरान मीडिया ने उनसे बात भी करने की कोशिश की, लेकिन वह कार में बैठकर निकल गए।
आशीष मिश्रा पर लखीमपुर खीरी में किसानों पर कार चढ़ाकर हत्या करने का आरोप है। पिछले साल तीन अक्टूबर को तिकोनिया गांव में किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में चार किसानों की मौत हो गई थी। इस घटना में एक पत्रकार सहित चार अन्य लोग भी मारे गए थे। इस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष को मुख्य अभियुक्त के तौर पर गिरफ्तार किया गया था।
पिछले साल तीन अक्टूबर को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री टेनी के एक बयान से नाराज किसान टेनी के गांव में एक कार्यक्रम में शिरकत करने जा रहे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे का विरोध कर रहे थे, उसी दौरान तिकोनिया गांव में हुई हिंसा में चार सिख किसानों समेत आठ लोगों की मौत हुई थी। घटना के आरोपियों में आशीष मिश्रा का नाम भी शामिल है।
चार किसानों समेत एक पत्रकार की मौत मामले में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्र उर्फ मोनू समेत 14 आरोपियों के खिलाफ एसआईटी आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इसकी सुनवाई जिला जज की कोर्ट में चल रही है। इस मामले आशीष मिश्रा 10 अक्टूबर से जिला जेल में बंद थे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें एक तेज रफ्तार जीप को किसानों को रौंदते हुए देखा गया था।
विपक्षी दलों ने तिकोनिया कांड को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमले किए थे और वे टेनी की भी गिरफ्तारी और बर्खास्तगी की मांग कर रहे हैं। टेनी की गिनती लखीमपुर खीरी के बड़े नेताओं में होती है।
वर्ष 2011 में निघासन थाने में एक लड़की की बलात्कार के बाद हत्या के मामले में चले आंदोलन की अगुवाई करने से उनका प्रभाव लगातार बढ़ता गया और अगले साल हुए विधानसभा चुनाव में वह निघासन सीट से बीजेपी के टिकट पर विधायक बने। उसके बाद 2014 और 2019 में वह लखीमपुर खीरी से सांसद चुने गए।