बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने कहा कि राज्य में एक निर्धारित समय सीमा के भीतर जाति आधारित जनगणना (caste-based census) की जाएगी और जल्द ही कैबिनेट का फैसला लिया जाएगा। बुधवार को यह घोषणा पटना में एक सर्वदलीय बैठक (all-party meeting) के बाद की गई थी। RJD नेता तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) ने इसकी मांग उठाई थी, जिसे अब मुख्यमंत्री का समर्थन भी मिल गया है।
नीतीश कुमार, जो खुद भी OBC कैटेगरी से आते हैं। उन्होंने कहा, "बैठक में हमने सर्वसम्मति से तय किया कि जाति आधारित जनगणना एक निर्धारित समय सीमा में की जाएगी। जल्द ही कैबिनेट का फैसला लिया जाएगा और यह पब्लिक डोमेन में मौजूद होगा।"
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने हालांकि, साफ किया कि यह जाति आधारित सर्वेक्षण होगा न कि जनगणना। तेजस्वी खुद भी सर्वदलीय बैठक में भी शामिल हुए थे।
'ये बिहार के लोगों की जीत है'
तेजस्वी यादव ने कहा, "हमने विधानसभा में इस (जातिगत जनगणना) मुद्दे को उठाया। ये बिहार के लोगों की जीत है। चुंकि बिहार एक पिछड़ा और गरीब राज्य है, तो इसमें मदद के लिए केंद्र सरकार को आर्थिक रूप से सहयोग करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा, "हमने इसको (बिल) अगली कैबिनेट बैठक में लाने और नवंबर महीने में इसे शुरू करने की बात कही है। छठ पूजा के दौरान बिहार से बाहर रहने वाले लोग भी राज्य में आएंगे और तब तक हम इसकी तैयारी पूरी कर सकते हैं।"
नीतीश कुमार के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर इस मांग पर जोर दिया था। हालांकि, केंद्र सरकार ने आखिरकार दलितों और आदिवासियों के अलावा दूसरे सामाजिक समूहों की गणना करने में असमर्थता जताई थी।
इसका OBC ने विरोध किया था, जो बिहार में राजनीति पर हावी हैं। खासकर 1990 के दशक से जब मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू किया गया था।