Delhi Riots: दिल्ली हिंसा मामले में सोनिया-राहुल गांधी और अनुराग ठाकुर सहित इन नेताओं के खिलाफ दर्ज हो सकता है FIR, हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस

याचिका में इन नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने और उनके खिलाफ जांच शुरू करने के लिए पक्षकार बनाने का अनुरोध किया गया है

अपडेटेड Feb 28, 2022 पर 7:05 PM
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आरोप है कि इन नेताओं के नफरती भाषणों की वजह से ही फरवरी, 2020 में दंगे हुए थे

Delhi Riots: दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता अनुराग ठाकुर, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया सहित अनेक नेताओं के नफरती भाषणों के लिए उनके खिलाफ FIR दर्ज करने के लिए दायर याचिका पर सोमवार को उन्हें नोटिस जारी किए। आरोप है कि इन नेताओं के नफरती भाषणों की वजह से ही फरवरी, 2020 में दंगे हुए थे।

याचिका में इन नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उनके खिलाफ जांच शुरू करने के लिए पक्षकार बनाने का अनुरोध किया गया है। उत्तर पूर्व दिल्ली में 2020 में हुए दंगों से जुड़ी अनेक याचिकाओं पर सुनवाई कर रही जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अनूप कुमार मेंदिरत्ता की पीठ ने उन सभी प्रस्तावित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए जिनके जिनके खिलाफ याचिका में कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।

पक्षकार बनाने के लिए एक याचिका शेख मुजतबा फारूक ने दाखिल की है, जिन्होंने केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, बीजेपी नेता कपिल मिश्रा, प्रवेश वर्मा और अभय वर्मा के खिलाफ नफरत भरे भाषण देने के आरोप में एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया है।


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अन्य अर्जी याचिकाकर्ता लॉयर्स वॉयस की है जिसने कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान, एआईएमआईएम नेता अकबरुद्दीन ओवैसी, AIMIM के पूर्व विधायक वारिस पठान, महमूद प्राचा, हर्ष मंदर, मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल, स्वरा भास्कर, उमर खालिद, बीजी कोलसे पाटिल और अन्य के खिलाफ नफरत फैलाने वाला भाषण देने के आरोप में FIR दर्ज करने का अनुरोध किया है।

हाई कोर्ट ने कहा कि इससे पहले कि हम पक्षकार बनाए, हमें उन्हें एक अवसर देना होगा। अगर उन्होंने इसका विरोध किया तो हम पक्षकार नहीं बना सकते। गौरतलब है कि पुलिस ने अपने हलफनामे में कहा था कि दंगों की जांच से अब तक कोई सबूत सामने नहीं आया है कि राजनीतिक नेताओं ने हिंसा भड़काई या इसमें शामिल थे। अब मामले की अगली सुनवाई 22 मार्च को होगी।

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