चुनाव आयोग (EC) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata) को नोटिस भेजा है, जिसमें आरोप है कि उनका हालिया भाषण आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है और 48 घंटे में जवाब देने की मांग की है। BJP नेता मुख्तार अब्बास नकवी की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए, पोल पैनल ने बनर्जी से हुगली के तारकेश्वर में 3 अप्रैल के उनके भाषण के बारे में स्पष्टीकरण मांगा, जहां एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए, उन्होंने मुस्लिम मतदाताओं से " अपने वोटों को विभाजित नहीं होने" के लिए अपील की थी।
चुनाव आयोग के नोटिस का जवाब देते हुए, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने TMC द्वारा की गई शिकायतों पर चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर सवाल उठाया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, "ममता दीदी को BJP की शिकायत पर चुनाव आयोग से नोटिस मिला है। TMC की शिकायतों का क्या... 1- बीजेपी प्रत्याशी को कैश बांटते हुए वीडियो साक्ष्य। 2- BJP की बैठक में शामिल होने और मतदान के लिए कैश कूपन बांटे गए। सज्जनों - कम से कम निष्पक्षता के अंतर को बनाए रखें!"
Mamatadi issued notice by @ECISVEEP on @BJP’s complaint
— Mahua Moitra (@MahuaMoitra) April 7, 2021
What about TMC complaints of
1. Video evidence of BJP candidate distributing cash
2. Cash coupons distributed to attend BJP mtng & vote
Gentlemen - at least keep up the farce of impartiality!
दरअसल BJP ने सोमवार को चुनाव आयोग से संपर्क करके बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने मुस्लिमों को एक साथ आने और राज्य विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी TMC के लिए मतदान करने के लिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन किया है।
वहीं ममता बनर्जी पर कटाक्ष करते हुए, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि मुस्लिमों के लिए टीएमसी सुप्रीमो की अपील से पता लगा है कि उन्हें डर है कि अल्पसंख्यक वोट उनके हाथ से फिसल रहे हैं।
मोदी ने कहा कि अगर उनकी जगह हमने सभी हिंदुओं को एकजुट हो जाने और BJP को वोट देने की अपील की होती तो उन्हें चुनाव आयोग के आठ-दस नोटिस मिल गए होते और देश भर के अखबारों में उनके खिलाफ संपादकीय छप जाते।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की अपील कर ममता बनर्जी ने सेल्फ गोल कर लिया है और साथ ही यह स्वीकार कर लिया कि वह चुनाव हार चुकी हैं। पश्चिम बंगाल में अपनी हर चुनावी रैली में ममता बनर्जी को दीदी ओ दीदी कहकर संबोधित करने वाले प्रधानमंत्री ने यहां रणनीति बदलते हुए अपने संबोधन में उन्हें आदरणीय दीदी, ओ दीदी कहकर संबोधित किया।
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