संसद सत्र के बाद ऐसी संभावना है कि विपक्षी INDIA ब्लॉक की एक बड़ी बैठक हो सकती है। लोकसभा नतीजों और हरियाणा और महाराष्ट्र में कांग्रेस की हार के बाद ये पहली बैठक होगी। सूत्रों का कहना है कि जनवरी में ये बैठक होने की संभावना है। इसमें बीजेपी से मुकाबला करने की रणनीति पर फिर से विचार करने और दिल्ली और बिहार जैसे दूसरे महत्वपूर्ण राज्यों के चुनावों से पहले गति बढ़ाने पर चर्चा संभव है। हालांकि, असली मुद्दा यह हो सकता है कि गठबंधन का संयोजक कौन होगा, क्योंकि इसे लेकर पिछले कुछ दिनों से काफी चर्चाएं तेज हैं।
अब तक, तृणमूल कांग्रेस के अलावा, RJD के लालू प्रसाद यादव, NCP, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी ने ममता बनर्जी को संयोजक बनाने की दावेदारी का समर्थन किया है।
टीएमसी सांसद सुष्मिता देव ने यह साफ कर दिया, जब उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी सात बार की सांसद, चार बार की केंद्रीय मंत्री, तीन बार की मुख्यमंत्री और चौथे कार्यकाल के करीब हैं। इन क्रेडेंशियल्स के साथ, उन्हें और कुछ साबित करने की जरूरत नहीं है। सुशासन पर उनके लगातार रिकॉर्ड और चुनावी तौर पर बीजेपी को बड़े पैमाने पर हराने की क्षमता ने देश भर के कई नेताओं को उन्हें एक बड़ी भूमिका में देखने के लिए प्रेरित किया है।''
हालांकि, असली रुकावट कांग्रेस है। News18 के मुताबिक, राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के सांसदों के साथ बैठक में उनसे कहा कि चुनावी हार को बाधा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल कांग्रेस है, जिसने बीजेपी के खिलाफ अपनी लड़ाई में कोई समझौता नहीं किया है और वह किसी भी नेतृत्व की भूमिका की दौड़ में नहीं है।
सच तो यह है कि कांग्रेस, गुट में किसी दूसरी पार्टी को जगह देने की इच्छुक नहीं है। इसमें राहुल गांधी को नेता के रूप में पेश किया गया है और इसका आधार यह है कि जब भी वह अभियान चलाते हैं, तो बीजेपी उन पर रिएक्ट करती है।
कांग्रेस को मंजूर नहीं ममता
उनके अभियानों की गूंज जमीन पर है और चुनावी हार के लिए राहुल गांधी या पार्टी को नहीं, बल्कि दोषपूर्ण चुनावी प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
CNN-News18 ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कांग्रेस नेताओं और गांधी ने सुझाव दिया कि बनर्जी ने मामला-दर-मामला आधार पर बीजेपी के साथ समझौता किया है और बातचीत भी की है। पार्टी को लगता है कि अगर उन्हें संयोजक बनाया गया, तो बीजेपी से मुकाबला करने वाले मोर्चे के रूप में INDIA ब्लॉक की छवि से समझौता हो सकता है।
जनवरी की इस बैठक में BJP के खिलाफ लड़ाई से ज्यादा नेतृत्व की भूमिका के बारे में चर्चा होने की संभावना है, जिसे लेकर कई लोगों का तर्क है कि इससे INDIA ब्लॉक बनाने का पूरा मकसद विफल हो जाता है।