भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) के राज्यपाल जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) को भारत के अगले उपराष्ट्रपति (Vice President) के रूप में NDA की पसंद के रूप में नामित किया है। पार्टी प्रमुख जेपी नड्डा (JP Nadda) ने घोषणा के दौरान धनखड़ को किसान का बेटा कह कर संबोधित किया। नड्डा ने धनखड़ की विनम्र पृष्ठभूमि और लोगों से जुड़ने की उनकी क्षमता पर जोर डाला।
राजस्थान के झुंझुनू जिले के किठाना गांव में एक कृषि परिवार में जन्मे 71 साल के धनखड़ का न केवल राजनीति में सफल करियर है, बल्कि उनका कानूनी करियर भी काफी अच्छा है।
धनखड़ की जीवन कहानी असंख्य सामाजिक और आर्थिक बाधाओं को पार करते हुए और अपने लक्ष्यों को पाने की भावना को दर्शाती है। वकील से राजनेता बने धनखड़ बचपन में स्कूल जाने के लिए हर रोज 5KM पैदल चलकर जाया करते थे। उन्होंने चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल में स्कॉलरशिप भी जीती थी।
फिजिक्स में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से कानून में डिग्री हासिल की। पहली पीढ़ी के पेशेवर होने के बावजूद, वह राज्य के प्रमुख वकीलों में से एक बन गए। धनखड़ ने राजस्थान हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों में प्रैक्टिस किया है।
वह राजस्थान हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष थे। धनखड़ सांसद और विधायक दोनों रह चुके हैं। अनुभवी प्रशासक तीन दशकों से ज्यादा समय से जन प्रतिनिधि रहे हैं।
जगदीप धनखड़ का जीवन परिचय:
- 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले के किठाना गांव में जन्म
- स्कूली शिक्षा सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ से पूरी की।
- राजस्थान यूनिवर्सिटी, जयपुर से फिजिक्स में ग्रेजुएशन की, फिर उसी विश्वविद्यालय से LLB की है।
- राजस्थान हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत की।
- राजस्थान हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रहे।
- 1990 में मनोनीत वरिष्ठ अधिवक्ता।
- 1989 के लोकसभा चुनाव में जनता दल के टिकट पर राजस्थान के झुंझुनू से सांसद चुने गए।
- संसदीय मामलों के राज्य मंत्री के रूप में सेवा की।
- 1993 के राज्य चुनावों में किशनगढ़ से राजस्थान विधानसभा के लिए चुने गए।
- जुलाई 2019 में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल नियुक्त हुए।
पश्चिम बंगाल में उन्होंने कड़ी मेहनत की और लोक कल्याण के मुद्दों पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने लोगों के बीच राज्यपाल के रूप में अपनी पहचान बनाई।
हालांकि, राज्यपाल के कार्यकाल के दौरान उनकी और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच हमेशा ही किसी न किसी मुद्दे पर ठनी रही।