झारखंड की राजनीति में जल्द ही बहुत बड़ी उठा-पटक देखने को मिल सकती है। खबर है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा को तगड़ा झटका लग सकता है और ये झटक कोई और नहीं बल्कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन दे सकते हैं। वही चंपई सोरेन जिन्हें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सबसे करीबी और भरोसेमंद नेताओं से एक माना जाता है। खबर ये भी है कि चंपई सोरेन जल्द ही भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकते हैं। वह अकेले नहीं बल्कि पार्टी के और भी कई विधायकों को तोड़ सकते हैं। इसमें एक पूर्व विधायक लोबिन हेंब्रम का नाम भी सामने आ रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो चंपई सोरेन अगले एक दो दिनों में राजधानी दिल्ली में बीजेपी के कुछ बड़े नेताओं से मुलाकात करने वाले हैं। ऐसा दावा किया जा रहा है कि इसके बाद वह दिल्ली में भी भगवा पार्टी में शामिल भी हो जाएंगे।
क्यों नाराज हैं चंपई सोरेन?
बड़ी बात ये है कि इस साल के आखिर में झारखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं और अगर इस वक्त चंपई सोरेन पार्टी छोड़ते हैं, तो JMM के लिए एक बहुत बड़ा नुकसान होगा। हालांकि, आधिकारिक तौर पर फिलहाल कुछ भी साफ नहीं है।
ऐसा बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद से चंपई सोरेन नाराज चल रहे थे। हुआ यूं कि हेमंत सोरेन को जमीन घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार कर लिया था।
तब गिरफ्तारी से ठीक पहले हेमंत ने इस्तीफा देकर, चंपई सोरेन को अपनी कुर्सी पर बैठा दिया था, लेकिन जब हेमंत सोरेन को जमानत मिली और वह जेल से बाहर आए, तो उन्होंने चंपई से इस्तीफा दिलवाकर फिर से मुख्यमंत्री का पद संभाल लिया। बस यही बात चंपई सोरेन को चुभ गई।
JMM प्रमुख शिबू सोरेन के वफादार माने जाने वाले राज्य के परिवहन मंत्री रह चुके चंपई सोरेन को "झारखंड टाइगर" के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने 1990 के दशक में अलग (झारखंड) राज्य के लिए चली लंबी लड़ाई में अपना योगदान दिया था।
सरकारी स्कूल से मैट्रिक तक की पढ़ाई करने वाले चंपई की शादी काफी कम उम्र में ही हो गई थी। उनके चार बेटे और तीन बेटियां हैं। उन्होंने 1991 में सरायकेला सीट से उपचुनाव में निर्दलीय विधायक चुने जाने के साथ अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत की। इसके चार साल बाद उन्होंने JMM के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा और BJP उम्मीदवार पंचू टुडू को हराया था।
वहीं, 2000 के विधानसभा चुनाव में इसी सीट पर वह बीजेपी के अनंत राम टुडू से हार गए। उन्होंने 2005 में बीजेपी उम्मीदवार को 880 वोटों के अंतर से शिकस्त देकर इस सीट पर फिर से अपना कब्जा जमा लिया।
चंपई ने 2009, 2014 और 2019 के चुनावों में भी जीत हासिल की। वह सितंबर 2010 से जनवरी 2013 के बीच अर्जुन मुंडा की अगुवाई वाली BJP-JMM गठबंधन सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे थे। फिर हेमंत सोरेन ने जब 2019 में राज्य में सरकार बनाई, तब चंपई खाद्य और नागरिक आपूर्ति और परिवहन मंत्री बनाए गए।