Jharkhand Political Crisis: झारखंड (Jharkhand) में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) की विधानसभा की सदस्यता रद्द होने की आशंका के बीच मंगलवार को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) के लगभग 40 विधायक पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजधानी रायपुर (Raipur) पहुंचे। खरीद-फरोख्त की किसी भी संभावना से बचने के लिए अगले कुछ दिनों ये विधायक राजधानी के आलीशान मेफेयर गोल्ड रिजॉर्ट में ठहरेंगे। रिजॉर्ट में भारी सुरक्षा तैनात की गई है। इसे दो दिनों के लिए बुक किया गया है। साथ ही इस पूरे इलाके को 'हाई सिक्योरिटी जोन' घोषित किया गया है।
रायपुर रवाना होने से पहले UPA विधायकों ने सोरेन के साथ झारखंड में उनके सरकारी आवास पर एक बैठक में हिस्सा लिया। सोरेन उनके साथ रांची एयरपोर्ट भी गए।
एयरपोर्ट के बाहर मीडिया से बात करते हुए सोरेन ने कहा, "हम किसी भी स्थिति के लिए तैयार हैं। कोई अप्रत्याशित घटना नहीं घटने वाली है। हम हर चीज के लिए तैयार हैं। स्थिति हमारे नियंत्रण में है। मैं आपको बता दूंगा कि क्या मैं भी विधायकों के साथ जाऊंगा या नहीं।"
PTI के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में सत्ताधारी दल कांग्रेस के नेताओं ने बताया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के लगभग 40 विधायक आज शाम विशेष विमान से रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पहुंचे।
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि विधायकों के रायपुर पहुंचने के बाद सुरक्षा के साथ बसों में उन्हें नवा रायपुर स्थित मेफेयर रिसॉर्ट के लिए रवाना किया गया।
हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने यह नहीं बताया कि विधायकों में कितने JMM और कांग्रेस के हैं। साथ ही वह यहां कब तक रुकेंगे। कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि विधायकों को खरीद-फरोख्त की कोशिशों से बचाने के लिए उन्हें रायपुर भेजा गया है।
हेमंत सोरेन की मुश्किलें क्यों बढ़ीं?
झारखंड के विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ लाभ के पद के मामले में निर्वाचन आयोग में याचिका लगाई थी। चुनाव आयोग ने 25 अगस्त को राज्य के राज्यपाल रमेश बैस को अपना फैसला भेज दिया है।
इधर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि उन राज्यों में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की जा रही है, जहां गैर भाजपाई सरकारें हैं और सरकारों को आतंकित करने की कोशिश की जा रही है।
JMM का मानना है कि BJP महाराष्ट्र की तरह सरकार गिराने के लिए उसके और कांग्रेस के विधायकों को अपने पाले में करने की कोशिश कर सकती है। इसलिए विधायकों को सुरक्षित जगह में रखने की जरूरत है।
पिछले डेढ़ साल में यह तीसरी बार है, जब कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के विधायकों को खरीद फरोख्त की आशंका के बीच रायपुर भेजा गया है।
इससे पहले इस साल 10 जून को राज्यसभा चुनावों में क्रॉस-वोटिंग की आशंका के बीच, हरियाणा में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपने विधायकों को रायपुर शिफ्ट किया था।
वहीं अप्रैल 2021 में असम विधानसभा चुनाव में मतगणना से पहले बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) के उम्मीदवारों को रायपुर लाया गया था। BPF असम विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन में सहयोगी था।
झारखंड के 81 सदस्यीय विधानसभा में UPA के 49 विधायक हैं, जिनमें JMM के 30, कांग्रेस के 18 और RJD का एक विधायक है। राज्य में सरकार बनाने के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत है।