Jharkhand Political Crisis: चुनाव आयोग (EC) की तरफ से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) को विधानसभा सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित (Disqualify) करने की सिफारिश के बाद से ही झारखंड (Jharkhand) में राजनीतिक अनिश्चितता जारी है। इसी कड़ी में झारखंड के सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों को मंगलवार को कांग्रेस (Congress) शासित छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के रायपुर (Raipur) में शिफ्ट किए जाने की संभावना है।
UPA विधायक मंगलवारो को रांची में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास से बसों में रवाना हुए और रांची एयरपोर्ट पहुंचे। यहां से अब उन्हें फ्लाइट के जरिए रायपुर भेजा जा सकता है।
Hindustan Times के मुताबिक, मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने कहा कि कुछ वरिष्ठ विधायकों के रुकने की संभावना है। जबकि बाकी के शाम 4 बजे के आसपास रायपुर के लिए रवाना होने की संभावना है। इन विधायकों रायपुर के बाहरी इलाके में एक रिसॉर्ट में ठहराया जा सकता है।
वहीं छत्तीसगढ़ सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि रिसॉर्ट में सांसदों की मेजबानी करने की तैयारी चल रही थी।
सोरेन ने यह मैसेज देने की कोशिश की है कि भले ही उनके भाग्य को लेकर संशय चल रहा है, लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), कांग्रेस (Congress) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का सत्तारूढ़ गठबंधन अब भी बरकरार है।
इससे पहले विधायकों को "मित्रवत राज्य" में भेजे जाने की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सोरेन खूंटी जिले के लतरातू बांध पर अपने साथी विधायकों के साथ नाव की सवारी की थी।
जब चुनाव आयोग ने राज्यपाल रमेश बैस को हेमंत सोरेन को विधायक रूप में अयोग्य ठहराने की सिफारिश की, तब से ही सोरेन अपने विधायकों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। हालांकि, राज्यपाल ने अभी तक अपना निर्णय सार्वजनिक नहीं किया है।
81 सदस्यों वाली विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के 49 विधायक हैं। JMM के 30, कांग्रेस के 18 और RJD के एक सदस्य हैं। मुख्य विपक्षी दल BJP पर सरकार गिराने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है। उसके सदन में 26 विधायक हैं।
हफ्ते के आखिर में कुछ ऐसी खबरें भी थीं कि सत्तारूढ़ गठबंधन अपने विधायकों को या तो पश्चिम बंगाल या छत्तीसगढ़ में शिफ्ट कर रहा है।
सोरेन को "लाभ के पद" की शिकायत पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत अयोग्यता का सामना करना पड़ा है। इसमें उन पर रांची के पास एक प्लॉट पर खनन पट्टा रखने का आरोप लगाया गया था।
बीजेपी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9 (A) का उल्लंघन करने के लिए सोरेन की अयोग्यता की मांग की है।
वहीं सोरेन के कार्यालय ने बीजेपी पर संवैधानिक प्राधिकारों का खुलेआम दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। इसने कहा है कि ऐसा लगता है कि पार्टी के नेताओं और कठपुतली पत्रकारों ने ECI रिपोर्ट का मसौदा तैयार किया है, जो कि एक सीलबंद लिफाफे में थी।