झारखंड के दुमका की 12वीं कक्षा की छात्रा अंकिता सिंह (Ankita Singh) पुलिस अधिकारी बनना चाहती थी। लेकिन उसकी जिंदगी बेरहमी से तब छिन गई जब शाहरुख ने उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। यह घटना 23 अगस्त की है। अंकिता की मौत के 3 दिन बाद पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया है। फॉरेंसिक साइंस और फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट की टीम मंगलवार को दुमका पहुंची और अंकिता के घर से सैंपल कलेक्ट किए।
दुमका में 23 अगस्त को शाहरुख नामक युवक ने एकतरफा प्यार में असफल होने पर 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली 16 साल की युवती को जिंदा जला दिया जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में स्थिति तनावपूर्ण होने के बाद प्रशासन ने वहां धारा 144 लगा दी है।
दुमका के एसपी अंबर लकड़ा ने पीटीआई को बताया कि घटना में 90 फीसदी झुलस गई युवती को इलाज के लिए रांची स्थित रिम्स में भर्ती कराया गया था, जहां रविवार (28 अगस्त) तड़के ढाई बजे उसकी मौत हो गई। इस बीच एसपी ने बताया कि दुमका में स्थिति नियंत्रण में है।
23 अगस्त को अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने वाले शाहरुख ने एकतरफा प्यार में असफल होने पर पड़ोस के कारोबारी संजीव सिंह की 16 वर्षीय बेटी अंकिता पर देर रात सोते समय खिड़की से पेट्रोल उड़ेल कर आग लगा दी थी, जिसमें वह 90 प्रतिशत जल गई थी। पुलिस ने बताया कि शाहरुख पिछले कुछ समय से अंकिता को परेशान कर रहा था और जब वह प्रेम संबंध रखने को राजी नहीं हुई तो आरोपी ने धमकी दी थी कि अगर मेरा कहा नहीं मानेगी तो तुम्हें मार डालूंगा।
पुलिस ने आरोपी युवक शाहरुख को गिरफ्तार कर मंगलवार को ही न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। दुमका के एसपी अंबर लकड़ा ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि एक इंस्पेक्टर स्तर का पुलिस अधिकारी अब मामले की जांच करेगा, जिसकी निगरानी एसपी स्तर के अधिकारी करेंगे।
अंकिता एक गर्ल्स स्कूल की छात्रा थी। वह एक पुलिस अधिकारी बनना चाहती थी। बचपन में कैंसर के कारण अपनी मां को खोने के बाद अंकिता के परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा, क्योंकि उन्हें अपनी मां के इलाज का लाभ उठाने के लिए अपनी जमीन और संपत्ति बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि उसके पिता की आय 200 रुपये प्रति दिन थी और इस दैयनीय स्थिति के कारण अंकिता ने छात्रों को ट्यूशन देना शुरू किया। उससे वह हर महीने 1,000 रुपये कमाने में सफल रही। अंकिता का परिवार दुमका में दो कमरों के घर में रहता था।
अंकिता ने पुलिस को क्या बताया?
अंकिता पर शाहरुख फोन पर बात करने का दबाव बना रहा था। एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट को दिए गए बयान के अनुसार, अंकिता ने कहा था कि आरोपी ने करीब 10 दिन पहले उसे अपने मोबाइल पर फोन किया और उसे अपना दोस्त बनने के लिए कहा। अंकिता ने बताया कि उसने (शाहरुख) मुझे सोमवार (अगस्त 22) रात करीब 8 बजे फिर से फोन किया और मुझसे कहा कि अगर मैंने उससे बात नहीं की तो वह मुझे मार डालेगा। मैंने अपने पिता को धमकी के बारे में बताया जिसके बाद उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि वह मंगलवार को उस व्यक्ति के परिवार से बात करेंगे।
अंकिता ने बताया कि इसके बाद खाना खाकर हम सोने चले गए। मैं दूसरे कमरे में सो रही थी। मंगलवार की सुबह, मुझे अपनी पीठ में दर्द महसूस हुआ और कुछ जलने की गंध आ रही थी। मेरी आंख खुली तो मैंने उसे भागते हुए देखी। मैं दर्द से कराहने लगी और अपने पिता के कमरे में चली गई। मेरे माता-पिता ने आग बुझाई और मुझे अस्पताल ले गए। अंकिता ने बड़ी मुश्किल से पुलिस के सामने अपना बयान दर्ज कराया था।
अंकिता नाबालिग थी या 18 साल से ऊपर?
झारखंड के दुमका जिले में बाल कल्याण समिति (CWC) ने कहा कि एक व्यक्ति ने 12वीं कक्षा की जिस छात्रा को आग लगाई थी वह नाबालिग थी तथा उसने पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई करने की मांग की। समिति ने कहा कि छात्रा की 10वीं कक्षा के मार्कशीट के अनुसार उसकी उम्र 16 साल के आसपास थी। समिति ने कहा कि वह बालिग नहीं थी जैसा कि पुलिस ने दावा किया।
दुमका सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष अमरेंद्र कुमार ने पीटीआई से कहा कि हम सिफारिश करते हैं कि FIR में बाल यौन अपराध संरक्षण (POCSO) कानून की धाराएं भी जोड़ी जाए, क्योंकि हमारी जांच के मुताबिक लड़की नाबालिग थी। अमरेंद्र ने कहा कि अंकिता की मार्कशीट के अनुसार उसका जन्म 26 नवंबर, 2006 को हुआ था, वह नाबालिग थी। इसलिए इस मामले में POCSO एक्ट के तहत धाराएं लागू होती हैं।