मध्य प्रदेश सरकार 31 मार्च, 2025 को चालू वित्त वर्ष खत्म होने से पहले 25,000 करोड़ रुपए का नया कर्ज लेने की योजना बना रही है। इसमें से 5,000 करोड़ रुपए का लोन तुरंत लिया जाएगा, जबकि बाकी की रकम अगले दो महीनों में चरणों में उधार ली जाएगी। राज्य बजट से पहले वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा वित्तीय रोडमैप के लिए इनपुट जुटाने के लिए अलग-अलग स्टेक होल्डर्स के साथ बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, बढ़ते राजकोषीय घाटे के कारण नए सिरे से उधार लेना जरूरी हो गया है।
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने नागरिकों को फाइनेंशियल मैनेजमेंट का आश्वासन देते हुए कहा, "हम नियमों के अनुसार कर्ज ले रहे हैं और उन्हें ब्याज सहित चुकाया जा रहा है। आगामी बजट में सभी वर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा। चिंता की कोई बात नहीं है।"
कर्ज बढ़कर 4.21 लाख करोड़ रुपए पर पहुंचा
NDTV ने अपनी रिपोर्ट में बताया, मध्य प्रदेश के कर्ज में पिछले पांच सालों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। मार्च 2020 में राज्य पर 2.01 लाख करोड़ रुपए का कर्ज था।
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2024 तक यह आंकड़ा 3.75 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। इस वित्तीय वर्ष के आखिर तक इसके 4.21 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो जाने का अनुमान है, यानी पांच साल में यह दोगुना हो जाएगा।
देश के कुल कर्ज में मध्य प्रदेश का हिस्सा 5% से ज्यादा है, जो उधार लेने के मामले में राज्यों में नौवें नंबर पर है। विपक्षी कांग्रेस ने राज्य की उधार लेने की प्रथाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने कहा, "जब सरकारी संपत्तियां बेची जा रही हैं, तो कर्ज क्यों लिया जाए? सरकार अंधाधुंध खर्च कर रही है - चाहे वह महंगी कैबिनेट बैठकें हों, महंगे पुल हों या आलीशान खरीददारी। कितनी पीढ़ियां इस कर्ज को चुकाएंगी? सरकार को पारदर्शिता लाने के लिए श्वेत पत्र जारी करना चाहिए।"
गुप्ता ने गैर-जरूरी चीजों पर हुए खर्च पर भी रोशनी डाली, जैसे कि 230 करोड़ रुपए का जेट विमान प्रस्ताव, मंत्रियों के बंगलों की रंगाई-पुताई के लिए 18 करोड़ रुपए और मंत्रियों के लिए SUV पर 5 करोड़ रुपए।
राज्य के खर्च का एक बड़ा हिस्सा कल्याणकारी योजनाओं, खासकर लाडली बहना पहल पर खर्च किया जाता है, जिस पर हर महीने करीब 1,600 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। सरकार ने राज्य भर में विकास परियोजनाओं में भी भारी निवेश किया है।