Maharashtra Political Crisis: नई सरकार या फिर चुनाव? किस करवट बैठेगा महाराष्ट्र के सियासी संकट का ये ऊंट
Maharashtra Political Crisis: उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने बुधवार को विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं होने के लिए शिंदे खेमे के 16 विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की है
किस करवट बैठेगा महाराष्ट्र के सियासी संकट का ये ऊंट
शिवसेना (Shiv Sena) के मंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) की बगावत के कारण महाराष्ट्र का राजनीतिक संकट (Maharashtra Political Crisis) मुख्यमंत्री और पार्टी सुप्रीमो उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के धड़े के साथ राज्य विधानसभा तक पहुंच गया है। अब शिवसेना की तरफ से कई बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है। शिंदे इन दिनों अपने वफादार विधायकों के साथ गुवाहाटी के एक लग्जरी होटल में डेरा डाले हुए हैं। वह कहते हैं कि उनके पास निर्दलीय समेत 50 विधायकों का समर्थन है। उनका गुट ही "असली शिवसेना" है।
ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने बुधवार को विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं होने के लिए शिंदे खेमे के 16 विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की है। इसका जवाब देते हुए शिंदे ने कहा कि संविधान की 10वीं शेड्यूल के अनुसार, पार्टी व्हिप विधायिका की कार्यवाही के लिए जारी किया जाता है न कि बैठक में भाग लेने के लिए।
महाराष्ट्र में वर्तमान शिवसेना-NCP-कांग्रेस सरकार तभी गिर सकती है, जब उद्धव ठाकरे संख्या की कमी के कारण इस्तीफा देने का विकल्प चुनते हैं या अगर वह विधानसभा में फ्लोर टेस्ट हार जाते हैं।
Maharashtra Political Crisis में अब आगे क्या हो सकता है?
राज्यपाल के पास गए शिंदे शिविर
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शिंदे खेमे से एक भावनात्मक अपील करते हुए पहले ही शीर्ष पद छोड़ने की पेशकश की है। अपने संबोधन के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री का सरकारी आवास 'वर्षा' छोड़ दिया और अपने पारिवारिक आवास 'मातोश्री' चले गए।
शिंदे, हालांकि बार-बार कह रहे थे उद्धव ठाकरे NCP और कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ दें। ऐसा माना जा रहा है कि ठाकरे खेमे में 15 से भी कम विधायक ही बचे हैं। ठाकरे खेमा शुक्रवार को बाद में शिवसेना के नगरसेवकों के साथ शक्ति प्रदर्शन की योजना बना रहा है।
साथ ही सरकार तब तक काम करती रहेगी, जब तक ठाकरे इस्तीफा नहीं देते या विधानसभा में फ्लोर टेस्ट में विफल नहीं हो जाते। दूसरी तरफ शिंदे और 50 विधायकों का दावा है कि उन्होंने आधिकारिक तौर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल को ठाकरे सरकार से समर्थन वापस लेने के बारे में जानकारी दी है।
इस्तीफा या फ्लोर टेस्ट
ऐसी स्थिति में उद्धव ठाकरे इस्तीफा देना चुन सकते हैं। इस स्थिति में, राज्यपाल हो सकता है बीजेपी से सरकार बनाने को कह सकते हैं, जिसे बाद में विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा। भगवा पार्टी शिंदे के समर्थन में खड़े विधायकों का साथ ले सकती है।
अगर ठाकरे इस्तीफा नहीं देते हैं, तो उन्हें विधानसभा में फ्लोर टेस्ट का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, सामने वाले गुट की संख्याबल देख कर ऐसा लग रहा है कि मुख्यमंत्री के इसमें विफल हो सकते हैं।
अगर ठाकरे फ्लोर टेस्ट में विफल हो जाते हैं, तो सरकार गिर जाएगी। ऐसे में फिर से एक ऐसी स्थिति बन जाएगी, जहां बीजेपी को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाएगा।
वहीं अगर बीजेपी संख्याबल नहीं जुटा पाती है, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने की संभावना है, जैसा कि नवंबर 2019 में हुआ था। इस अवधि के दौरान सरकार बनाने के विकल्प तलाशे जाते हैं और नए गठबंधन बनाए जा सकते हैं। हालांकि, अगर गतिरोध जारी रहता है, तो राज्य में नए विधानसभा चुनाव होंगे।
दलबदल विरोधी कानून
दलबदल विरोधी कानून के तहत उन विधायकों पर कार्रवाई की जाती है, जो पार्टियां बदलते हैं। इसके तहत उन्हें आयोग्य भी करार दिया जाता है। सांसद और विधायक, हालांकि, कानून से बच सकते हैं, अगर उनकी संख्या विधायिका में पार्टी की ताकत के दो-तिहाई से ज्याद या उसके बराबर हो।
तब ये गुट किसी दूसरी पार्टी में विलय कर सकता है या सदन में एक अलग समूह बना कर रह सकता है। शिंदे खेमे समेत 288 सदस्यीय विधानसभा में शिवसेना के 55 विधायक हैं। दलबदल विरोधी नियम से सुरक्षित रहने के लिए शिंदे को कम से कम 36 विधायकों की जरूरत है।